Bakrid 2026 Date in India (भारत में बकरीद कब है) : मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े त्योहारों में शामिल ईद-उल-अजहा यानी बकरीद 2026 कब पड़ेगी, इसका निर्णय चांद के दिखने पर होता है। इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने धुलहिज्जा' (ज़ु अल-हज्जा) या ज़िल हिज्जा की 10वीं तारीख मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित होता है, इसलिए बकरीद की तारीख भी चांद दिखने के बाद ही तय होती है।
कब है बकरीद 2026
ऐसे में 17 मई 2026 को ज़िल हिज्जा महीने का चांद देखने की कोशिश की गई थी। इस दिन चांद नहीं दिखा था। इसके बाद 18 मई को चांद देखा गया। इस कारण बकरीद 28 मई 2026 को होगी।
हज का महीना होता है ज़िल हिज्जा
बकरीद इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने 'धुलहिज्जा' (ज़ु अल-हज्जा ) में मनाई जाती है। ज़िल हिज्जा (Dhul Hijjah) इस्लामी या हिजरी कैलेंडर का बारहवां और अंतिम महीना होता है। इसे अरबी में 'धुल हिज्जा' भी कहा जाता है। इसका अर्थ हज का महीना होता है। यह महीना इस्लाम धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है क्योंकि इसी महीने हज यात्रा भी पूरी की जाती है। ईद-उल-अजहा जुलहिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान विशेष नमाज अदा करते हैं और कुर्बानी की रस्म निभाते हैं। इस महीने की 10, 11 और 12 तारीख को कुर्बानी अदा की जाती है, इसकी शुरुआत 10 ज़िल हिज्जा को ईद-उल-अधा के साथ हो जाती है। इस दौरान अल्लाह की राह में कुर्बानी दी जाती है।
क्यों दी जाती है बकरीद पर कुर्बानी
बकरीद पर कुर्बानी देने के पीछे गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, एक पैगंबर ने अल्लाह के हुक्म पर अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने का फैसला किया था। उन्होंने अपने बेटे को भी अल्लाह की राह में कुर्बान करने की तैयारी कर ली थी। उनकी इस आस्था और समर्पण से खुश होकर अल्लाह ने उनके बेटे की जान बचा ली और उसकी जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार की, तभी से ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी देने की परंपरा चली आ रही है। कुर्बानी को त्याग, विश्वास और इंसानियत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपनी हैसियत के अनुसार बकरा, भेड़, ऊंट या अन्य जानवर की कुर्बानी देते हैं।
कुर्बानी का क्या है महत्व
इस्लाम में कुर्बानी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि त्याग और जरूरतमंदों की मदद का संदेश भी मानी जाती है। कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा है।
- एक हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है
- दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है
- तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है
