Ashtami Puja Samagri List Hindi Mein: नवरात्रि की अष्टमी तिथि का अपना एक अलग ही उत्साह और भक्ति भाव होता है। इस दिन मां दुर्गा के पूजन के साथ-साथ कन्या पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि बिना सही विधि और पूजन सामग्री के अष्टमी की पूजा अधूरी रह जाती है। यही कारण है कि श्रद्धालु इस दिन पूरी तैयारी के साथ मां की आराधना करते हैं और छोटी-छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन करते हैं। चैत्र नवरात्र 2026 की अष्टमी 26 मार्च को पड़ेगी। यहां देखें अष्टमी पूजा के हवन के लिए क्या क्या सामान लगता है।
अष्टमी हवन व पूजन सामग्री की पूरी सूची
अष्टमी पूजा सामग्री सूची
- धूप
- जौ
- कलावा (मौली)
- नारियल
- गुग्गल
- लोबान
- शहद
- दूर्वा
- गाय का घी
- सुगंध
- अक्षत
- मखाना
- चीनी या बूरा
- तिल
- चावल
- काला तिल
- कपूर
- पलाश
- सुपारी
- पान के पत्ते
- इलायची
- लौंग
- कमल गट्टा
- गूलर की छाल
- मुलहठी की जड़
- अश्वगंधा
- गोबर की उप्पलें
- आम की लकड़ी
- चंदन की लकड़ी
- माचिस
- काजू
- हवन सामग्री का एक पैकेट
- गंगाजल
- किशमिश
- छुहारा
- मूंगफली
- बेल पत्र
- हवन कुंड (बाजार में उपलब्ध या 8 ईंटों से बना हुआ)
- बैठने के लिए आसन
- दुर्गा सप्तशती, पूजा और हवन की पुस्तिका
- ताजे फूल और माला
- 5 प्रकार के फल
हवन की सरल विधि
अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें, फिर पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल और फल अर्पित करें और दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। अष्टमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, इसलिए 2 से 9 छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनका पूजन करें। उनके चरण धोकर तिलक लगाएं और उन्हें प्रसाद स्वरूप पूरी, हलवा और चने खिलाएं। कन्याओं को उपहार या दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। इस दिन माता को नारियल, मिठाई और पान अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। अंत में आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना करें।
अष्टमी पर कौन कौन सी माता की पूजा होती है
अष्टमी के दिन मुख्य रूप से मां दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दिन विशेष रूप से मां महागौरी और मां काली की आराधना का महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर अष्टमी को मां चामुंडा की पूजा भी की जाती है, जो बुराई का नाश करने वाली मानी जाती हैं। इसके अलावा दुर्गा के सभी नौ रूपों (नवदुर्गा) का स्मरण और पूजन भी किया जाता है। अष्टमी पर कन्या पूजन के जरिए छोटी कन्याओं में मां दुर्गा के स्वरूप की पूजा की जाती है। यह दिन शक्ति, साहस और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए विशेष माना जाता है। भक्त इस दिन माता से सुख, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं।
