Anant Chaturdashi Aarti In Hindi: अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (भादो महीने के शुक्ल पक्ष की 14वीं तिथि) को मनाया जाता है। यह विशेष दिन मुख्यतः भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए समर्पित होता है। इस दिन भक्तगण 14 गांठों वाला रेशमी धागा (अनंत सूत्र) बनाकर पूजा करते हैं और इसे दाहिने हाथ (पुरुष) या बाएं हाथ (महिलाएं) में बांधते हैं। साथ ही पूजा के बाद आरती भी करने का विधान है। यहां से आप अनंत चतुर्दशी की आरती के लिरिक्स देख सकते हैं।
अंनत चतुर्दशी आरती (Anant Chaturadashi Aarti, Vishnu Ji Ki Aarti)
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
