Akshaya Tritiya 2026 Puja Vidhi (अक्षय तृतीया पूजा विधि): अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक बहुत ही शुभ और पवित्र त्योहार माना जाता है। अक्षय का मतलब होता है, जो कभी खत्म न हो। मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे काम, दान-पुण्य और नई शुरुआत का फल हमेशा बढ़ता रहता है। ये त्योहार खासतौर पर वैशाख महीने की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं, सोना खरीदते हैं और घर में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। अक्षय तृतीया पर दान करना, मीठा बनाना और परिवार के साथ समय बिताना बहुत शुभ माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन घरों में खीर, हलवा जैसे पारंपरिक पकवान बनाकर त्योहार की मिठास को और बढ़ाया जाता है। यहां से आप जान सकते हैं कि
अक्षय तृतीया की पूजा कैसे करें (pc: pinterest)
अक्षय तृतीया पूजा सामग्री लिस्ट-
- विष्णु भगवान और लक्ष्मी माता की फोटो
- लक्ष्मी-गणेश जी की फोटो
- पीला कपड़ा
- मिट्टी का घड़ा जल से भरा़
- गेहूं
- कलावा
- घी का दीपक
- चंदन
- अक्षत
- कलावा
- भगवान नारायण और गणेश जी के लिए जनेऊ
- इत्र
- दक्षिणा
- फल
- फूल
- अक्षय तृतीया पर खरीदा गया सामान
अक्षय तृतीया पूजा मंत्र-
-ॐ श्रीं क्लीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा
-ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:।
अक्षय तृतीया पूजा विधि-
घर में जहां भी अक्षय तृतीया की पूजा करनी है उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद वहां एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछा लें। चौकी पर माता लक्ष्मी, श्री हरि विष्णु, भगवान गणेश और कुबेर देवता की मूर्ति स्थापित करें। साथ में वहीं घर पर रखा सोना-चांदी और जौ रखें। अब सबसे पहले गणेश जी की वंदना करें और साथ ही उन पर अक्षत, सिंदूर, सुपारी, नारियल, धूप, दीप, चंदन, दूर्वा, पान, फूल, फल, मोदक आदि चढ़ाएं। फिर माता लक्ष्मी की विधि विधान पूजा करें। मां लक्ष्मी को कुमकुम, अक्षत, कमलगट्टा, माला, हल्दी, धूप, दीप, कमल का फूल, लाल गुलाब का फूल आदि अर्पित करें। फिर उन्हें मखाने की खीर बनाकर भोग लगाएं। इसके बाद विधि विधान कुबेर देवता की पूजा करें। उनको भी अक्षत, कमलगट्टा, इत्र, लौंग, चंदन, दूर्वा, इलायची, नैवेद्य, फल, सुपारी, धनिया, फूल आदि अर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कनकधारा स्तोत्र या श्री सूक्त का पाठ करें। साथ ही कुबेर चालीसा और गणेश चालीसा का पाठ करें। पूजा के समय माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता के मंत्रों का जाप भी शुभ माना जाता है। अंत में माता लक्ष्मी की आरती कर प्रसाद सभी में बांट दें।
