Aaj Konsi Aarti Karni hai (आज की आरती के लिरिक्स) Aaj ki aarti ke Lyrics: राम नवमी पर भगवान श्रीराम जी की आरती करने का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं इस दिन माता रानी की आरती भी की जाती है। क्योंकि ये नवरात्रि का अंतिम दिन होता है। आज का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास और पुण्यदायी है। आज राम नवमी और चैत्र नवरात्रि के समापन का अद्भुत संयोग है। ऐसे में कई भक्तों के मन में यह सवाल होता है कि आज किसकी आरती करनी चाहिए। आज भगवान श्रीराम की आरती करें या मां दुर्गा की? आज आप केवल दो नहीं बल्कि तीन आरती कर सकते हैं। आइए जानते हैं आज के दिन की आरती के लिरिक्स...
आज की आरती के लिरिक्स
आज कौन सी आरती करनी चाहिए?
चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है, जो देवी दुर्गा का अंतिम स्वरूप मानी जाती हैं। इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव यानी राम नवमी भी मनाया जाता है। यह दिन भक्ति, धर्म और शक्ति का अद्भुत संगम होता है। इसलिए आप अंतिम नवरात्र के पूजन में मां सिद्धिदात्री की आरती करें और पूजन के समापन में मां दुर्गा की आरती करें। इसके अलावा आज राम जन्मोत्सव भी है, तो आपको दोपहर के सयम भगवान राम की आरती करनी चाहिए। आगे पढ़ें तीनों आरती के लिरिक्स...
मां सिद्धिदात्री की आरती - Navami Aarti Lyrics
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता।
दुर्गा माता की आरती के लिरिक्स - Maa Durga ki Aarti Lyrics
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।
रक्त पुष्प गलमाला, कंठन पर साजे॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर मुनि जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
शुंभ-निशुंभ विदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोकन नैना, निशदिन मदमाती॥
चंड-मुंड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरव।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हर्ता, सुख संपत्ति करता॥
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
भगवान श्रीराम की आरती - Ram ji ki Aarti Lyrics
आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥
दशरथ तनय कौशल्या नन्दन,
सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥
अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन,
मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥
निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि,
सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥
हरण शोक-भय दायक नव निधि,
माया रहित दिव्य नर वर की॥
जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥
विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति,
एक मात्र गति सचराचर की॥
शरणागत वत्सल व्रतधारी,
भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥
नाम लेत जग पावनकारी,
वानर सखा दीन दुख हर की॥
