Aaj Konsa Grahan hai, Aaj Chandra Grahan hai kya, Aaj ka Grahan Kab se kab tak hai (आज ग्रहण का टाइम, सूतक कब तक चलेगा): हिंदू पंचांग अनुसार आज श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि है, भारतीय परंपरा में बहुत पवित्र माना जाता है और इस बार इसकी खासियत कुछ और बढ़ गई है। आज 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है। साथ ही इसी दिन वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है।भारतीय संस्कृति में पूर्णिमा की रात को चंद्रमा मन, शांति और शीतलता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए आज का दिन आध्यात्मिक भाव से देखने पर भी विशेष लगता है।
आज कौनसा ग्रहण है
आज 28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण लग रहा है, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इसके बाद अगला चंद्र ग्रहण 20-21 फरवरी 2027 को उपछाया चंद्र ग्रहण के रूप में होगा; भारत में यह 21 फरवरी की तड़के दिखाई दे सकता है। इसके बाद 18 जुलाई 2027 और 17 अगस्त 2027 को भी उपछाया चंद्र ग्रहण होंगे।
ग्रहण कब से कब तक रहेगा?
आज ग्रहण की प्रक्रिया भारतीय समय के अनुसार सुबह से शुरू होगी। पंचांग गणना के अनुसार इसका उपछाया चरण करीब सुबह 6:55 बजे शुरू होगा। इसके बाद लगभग सुबह 8:04 बजे आंशिक चंद्र ग्रहण का चरण शुरू होगा।
ग्रहण अपने अधिकतम चरण के करीब सुबह 9:43 बजे रहेगा। इसके बाद आंशिक ग्रहण लगभग 11:21 बजे समाप्त हो जाएगा, जबकि उपछाया का पूरा चरण करीब दोपहर 12:30 बजे तक समाप्त माना जाएगा।
यानी ग्रहण के अलग-अलग चरणों के कारण इसके लिए एक ही समय बताना सही नहीं होगा। जिस तरह चंद्रमा धीरे-धीरे अपनी छाया में आता है और फिर उससे बाहर निकलता है, उसी तरह ग्रहण भी कई चरणों में पूरा होता है।
क्या भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण?
नहीं, भारत में आज 28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में लोग इसे अपनी आंखों से चंद्रमा पर घटित होते हुए नहीं देख पाएंगे। यह ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों सहित दुनिया के कुछ अन्य क्षेत्रों में दिखाई देगा।
क्या आज सूतक काल मान्य होगा?
ग्रहण को लेकर धार्मिक आस्था में सूतक का भी विशेष स्थान है। सामान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई देता है, वहां उससे पहले सूतक काल माना जाता है। चूंकि आज का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है, इसलिए भारत में धार्मिक परंपरा के अनुसार इसका सूतक काल मान्य नहीं माना जा रहा है। इसका अर्थ है कि रक्षाबंधन से जुड़े पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकते हैं।
धार्मिक जीवन में ग्रहण को आत्मचिंतन, प्रार्थना और मन को शांत करने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। भारत में आज ग्रहण दिखाई भी नहीं देगा, इसलिए रक्षाबंधन के पर्व को लेकर किसी तरह की अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है।
