16 July 2026 ko Kya Hai: भारत में त्योहारों की सबसे खूबसूरत बात यही है कि यहां एक ही दिन अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग परंपराएं जीवंत हो उठती हैं। 16 जुलाई 2026,गुरुवार का दिन भी ऐसी ही एक वजह से खास माना जा रहा है। दरअसल, इस एक तारीख पर पूरे देश में अलग-अलग पर्व मनाए जाएंगे।
16 जुलाई 2026 की तारीख क्यों खास है, देश भर में मनेंगे एक साथ इतने त्योहार
16 जुलाई 2026 को कौन सी तिथि है
पंचांग के अनुसार, 16 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी। इस तिथि पर कर्क संक्रांति आएगी जिससे सूर्य दक्षिणायन। वहीं उत्तराखंड में हरेला मनाया जाएगा। पंजाब और आसपास के राज्यों में सावन संग्रांद का पर्व होगा। इसके अलावा, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा निकलेगी। वहीं दक्षिण भारत में भी नए सौर महीनों की शुरुआत का उत्सव देखने को मिलेगा।
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16 जुलाई 2026 को कर्क संक्रांति
16 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि परिवर्तन को कर्क संक्रांति कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार कर्क संक्रांति की तिथि से ही सूर्य दक्षिणायन होते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण (मकर संक्रांति) को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को उनकी रात्रि कहा गया है।
इसी कारण इस समय को पूजा, जप, दान, तप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है।
हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। कई लोग दक्षिणायन और चातुर्मास को एक ही मान लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से मानी जाती है। इसलिए दोनों की धार्मिक अवधारणा अलग-अलग है।
16 जुलाई 2026 को पंजाब में सावन संग्रांद
16 जुलाई 2026 को जुलाई मास की संग्रांद रहेगी। इस तिथि के साथ पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सावन संग्रांद का पर्व मनाया जाएगा।
बता दें कि इन जगहों पर सौर पंचांग चलता है और इसके अनुसार संग्रांद से नया मास आरंभ होता है। इस तरीके से जुलाई में ही सावन महीने की शुरुआत हो जाएगी। हालांकि यह स्पष्ट रहे कि इसका संबंध उत्तर भारत के चंद्र पंचांग वाले श्रावण मास से नहीं है।
संग्रांद के दिन श्रद्धालु सुबह-सुबह गुरुद्वारों में मत्था टेकते हैं। गुरुबाणी का पाठ सुनते हैं। कई घरों में संग्रांद पर कड़ाह प्रसाद, खीर या मीठा भोजन भी बनाया जाता है।
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16 जुलाई 2026 को उत्तराखंड में हरेला का त्योहार
उत्तराखंड का हरेला केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी दिन माना जाता है। हरेला की तैयारी इसकी सही तारीख से नौ दिन पहले ही शुरू हो जाती है। घरों में गेहूं, जौ, धान या मक्का के बीज बोए जाते हैं। 16 जुलाई तक जब इनसे हरे अंकुर निकल आते हैं, तो उन्हें काटकर देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है।
हरेला खेती, हरियाली और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यह पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा अभियान बन गया है। हरेला के मौके पर उत्तराखंड में हजारों पौधे लगाए जाते हैं और लोगों को प्रकृति बचाने का संदेश दिया जाता है।
16 जुलाई 2026 को पुरी में निकलेगी रथ यात्रा
16 जुलाई को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का भी आरंभ होगा। इस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने-अपने विशाल रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। यह यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है।
16 जुलाई 2026 को दक्षिण भारत में आरंभ होगा रामायण मास
16 जुलाई से दक्षिण भारत में भी नए सौर मास का आरंभ होगा। इस तारीख से केरल में कर्किडकम महीने का आरंभ होगा जिसे रामायण मास भी कहा जाता है। इस पूरे मास में घरों और मंदिरों में रामायण का पाठ करने की परंपरा है
वहीं तमिलनाडु में इस तिथि से आदि मास आरंभ होगा। यह महीना देवी शक्ति की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। आदि शुक्रवार और आदि मंगलवार के दिन मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं।
इस तरह 16 जुलाई 2026 केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता की जीवंत तस्वीर भी है।
