Vedic Rakhi: सूरत में गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने की मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए रक्षाबंधन के मौके पर एक अनोखी पहल शुरू की गई है। इस अभियान के तहत गौशालाओं में गोबर और गोमूत्र से हजारों वैदिक राखियां तैयार की जा रही हैं।
राखी के जरिए गोरक्षा का संदेश, गोबर और गोमूत्र से तैयार हो रहीं वैदिक राखियां
इन राखियों को देसी गाय के गोबर के पाउडर और गोमूत्र के मिश्रण से तैयार किया जा रहा है। राखियों पर ‘गौमाता-राष्ट्रमाता’ जैसे स्लोगन वाले स्टिकर लगाए गए हैं। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इसके जरिए रक्षाबंधन के पर्व को गोरक्षा और गोसंवर्धन के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सूरत समेत कई राज्यों में भेजी जा रहीं राखियां
रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए इन वैदिक राखियों की सूरत के साथ देश के अलग-अलग राज्यों और स्थानीय बाजारों में भी मांग बताई जा रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए गौशालाओं में बड़ी संख्या में राखियां तैयार की जा रही हैं।
गौशाला संचालकों के मुताबिक, हजारों राखियां तैयार कर आम लोगों तक पहुंचाने की योजना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ सकें।
राखी के जरिए गोरक्षा का संदेश
अभियान से जुड़े गोभक्तों का कहना है कि रक्षाबंधन पर जब भाई की कलाई पर यह राखी बांधी जाएगी, तो इसके साथ गोरक्षा और गोसंवर्धन का संकल्प भी लिया जाएगा।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ‘गौमाता आह्वान अभियान’ से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना बताया गया है। इससे पहले गोभक्तों की ओर से गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भी सौंपे गए थे।
अभियान से जुड़े लोगों का दावा है कि इन राखियों के जरिए इस मांग को व्यापक जनसमर्थन दिलाने और सरकार तक लोगों की आवाज पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का आधिकारिक दर्जा देने की मांग फिलहाल एक अभियान के रूप में ही उठाई जा रही है। इस पहल के जरिए समर्थक रक्षाबंधन के अवसर पर इसे व्यापक जन-अभियान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
