Best Saree's Of Gujarat (बेस्ट गुजराती साड़ियां): नवरात्रि के नौ दिनों का त्योहार न केवल आस्था और उल्लास, बल्कि शानदार पारंपरिक पोशाकों का भी प्रतीक है। इस दौरान गरबा और डांडिया की थाप पर थिरकती महिलाओं की छवि गुजरात की संस्कृति की पहचान बन चुकी है। इस नवरात्रि अगर आप अपने परिधान में खास गुजराती अंदाज़ जोड़ना चाहती हैं, तो पटोला सिल्क और बांधनी साड़ी से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। ये दोनों ही साड़ियाँ न सिर्फ शानदार दिखती हैं, बल्कि गुजरात के समृद्ध बुनकरी इतिहास की गाथा भी कहती हैं।
पटोला साड़ी - शाही विरासत का प्रतीक
गुजरात की पाटन पटोला साड़ियां सबसे कीमती और शानदार किस्म की साड़ियों की गिनती में आती हैं। पाटन की इस इकत बुनकरी कला को जीआई टैग भी मिला हुआ है। पाटन पटोला साड़ियों को बनाने की यूनिक तकनीक इसे और भी खास बनाती है। जहाँ ताना और बाना दोनों को ही बुनने से पहले ही बारीकी से रंगा और डिज़ाइन किया जाता है। इसकी बनावट इतनी जटिल होती है कि एक साड़ी तैयार होने में कई महीनों से लेकर एक साल तक का समय लग जाता है।
बांधनी साड़ी - रंगों की रानी
बांधनी साड़ियां गुजरात और राजस्थान दोनों में ही बहुत लोकप्रिय हैं। वहीं इस बार की नवरात्रि पर कुछ ट्रेडिशनल पहनना है, तो बांधनी साड़ी या लहंगा भी ट्राई करना बनता है। बांधनी साड़ी पर हाथ से बनाए गए छोटे-छोटे बिंदु के नमूने, जो चटख और जीवंत रंगों में सजे होते हैं बहुत ही खास और यूनिक बनाते हैं। बांधनी साड़ियों को शुभ और मंगल अवसरों पर पहना जाता है। तो इसे इस बार की नवरात्रि पर पहनना तो बहुत ही ज्यादा शुभ होगा।
नवरात्रि में क्यों है खास
अगर आप नवरात्रि के शुभ अवसर पर कुछ ट्रेडिशनल गुजराती पहनना चाहती है, तो ये वाली पाटन पटोला तो बांधनी की साड़ियां बेस्ट हो सकती हैं। जो शाही और एलिगेंट दोनों है, इस पर बने पारंपरिक ज्यामितीय नमूने, फूल-पत्तियों के डिज़ाइन, टाय एंड डाई के चमकदार रंग गरबा के मैदान में आपको सबसे अलग और आकर्षक बनाते हैं। पटोला तो बांधनी साड़ियों से आप लहंगा चोली या सूट भी बनवा सकते हैं।
