History of Champaran Meat: बिहार का चंपराण सिर्फ सत्याग्रह के लिए ही नहीं बल्कि हांडी मटन के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है। बिहार के फेमस नॉन वेज फूड्स की बात की जाए तो उसमें सबसे पहला नाम हांडी मटन का आता है। इसी हांडी मटन को देशभर में चंपारण मीट के नाम से भी जाना जाता है। चंपारण मीट या हांडी मटन खाने में जितना स्वादिष्ट है, उतना ही दिलचस्प इसका इतिहास भी है।
हांडी मटन का मतलब क्या है?
चंपारण या हांडी मटन का इतिहास जानने से पहले ये जान लेते हैं कि आखिर हांडी मटन का मतलब क्या होता है जिसकी पूरी दुनिया दीवानी है। दरअसल इस मटन को मिट्टी के बर्तन में तैयार किया जाता है जिसे बिहार में हांडी के नाम से जाना जाता है। इसलिए इस जायकेदार डिश को हांडी मटन कहा जाता है। इसे अहुना मटन भी कहा जाता है। अहुना एक भोजपुरी शब्द है जिसका अर्थ है मिट्टी का बर्तन या हांडी। चंपारण में मीट को हांडी में पकाया जाता है और हांडी के मुंह को आटे से बंद कर दिया जाता है। इस मटन को सीलबंद बर्तनों में लकड़ी के कोयले पर धीरे-धीरे पकाया जाता है जिससे खाने में एक सौंधा स्वाद आता है।
चंपारण मीट का इतिहास
ऐसा माना जाता है इस जायकेदार डिश की शुरुआत बिहार-नेपाल बॉर्डर के पास बसे घोड़ासहन नामक गांव में हुई थी। वहां से ये डिश बिहार के चंपारण पहुंचा जहां इस डिश को बनाने का नया आयाम दिया गया और देखते ही देखते ये डिश देशभर में फेमस हो गई। चंपारण मटन की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस डिश का स्वाद चखने के लिए लोग दूर दूर से लोग बिहार के मोतिहारी आते हैं।
बिहार के मोतिहारी के एक प्रसिद्ध नॉन वेज शॉप चलाने वाले रोजाना 100 किलो से ज्यादा मटन बिक जाती है। कीमत की बात करें तो एक किलो हांडी मटन की कीमत तकरीबन 1000 रुपये है। यहां के हांडी मटन की दुनिया दीवानी है। इस शहर के लोग बताते हैं कि यहां के जायसवाल मीट हाउस ने ही 15 साल पहले अहुना मटन की शुरुआत की थी।
आज चंपारण मीट इतना फेमस है कि इस शहर के लगभग हर चौक-चौराहे पर ये डिश मिलती है और लोग बड़े शौक से इसका आनंद लेते हैं। ये डिश चंपारण से निकलकर धीरे-धीरे देश के हर कोने में मशहूर हो गया। इस डिश की दीवानगी को देखते हुए देश के हर कोने में चंपारण मटन बिकने लगा है।
क्यों खास है अहुना मटन
वैसे तो देशभर में मटन की कई डिशेज मिलती हैं लेकिन ये सवाल उठता है कि अहुना मटन ही इतनी लोकप्रिय क्यों है। इसकी वजह स्लो कुकिंग और मसालों का मिश्रण है। इस डिश को लकड़ी के कोयले पर मिट्टी के बर्तन में तैयार किया है। इसके लिए एक किलो मटन में प्याज, सरसों का तेल और मसालों को मिक्स कर हांडी में डालकर कोयले पर पकाया जाता है। जिसकी वजह से इसका अलग स्वाद निकलकर सामने आता है।
बन चुकी है फिल्म
चंपारण मटन इतना फेमस है कि इस पर एक शॉर्ट फिल्म भी बन चुकी है जो ऑस्कर के सेमीफाइनल तक पहुंची थी। इस फ़िल्म को कई लोगों ने सराहा है। यह फ़िल्म ऑस्कर के स्टूडेंट एकेडमी अवार्ड की फ़िल्म नैरेटिव कैटेगरी के सेमीफ़ाइनल में पहुंच गई थी। चंपारण मटन एक आम परिवार के रिश्तों और उनके संघर्ष की कहानी थी। इस फ़िल्म की शूटिंग महाराष्ट्र के बारामती में हुई है। यह ऑस्कर में तीन श्रेणियों में नामांकन प्राप्त करने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी थी।
चंपारण मटन बनाने की रेसिपी
तले हुए प्याज के लिए
3 मीडिया साइज के प्याज
तलने के लिए तेल
मैरिनेशन के लिए
2-3 हरी मिर्च, इन्हें दो भागों में काट लें
¼ कप ताजे पुदीने की पत्तियां
1 ½ बड़ा चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट
1 ⅓ कप दही
2-3 बड़ा चम्मच धनिया पाउडर
1 चम्मच देगी लाल मिर्च पाउडर
½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
नमक स्वाद अनुसार
2 बड़ा चम्मच हरा धनिया
तला हुआ प्याज
2 चम्मच तले हुए प्याज का तेल
1 किलो मटन
1 बड़ा चम्मच घी
¼ कप तले हुए प्याज का तेल
2 साबुत लहसुन की कली
हांडी गोश्त के लिए
¼ कप घी
3-4 सूखी लाल मिर्च
1 तेज पत्ता
1 इंच दालचीनी की छड़ी
मटन को मैरिनेट करने के लिए एक किलो मटन लें। फिर इसमें बारिक कटा प्याज, सरसों का तेल और खड़े मसाले समेत पीसे हुए मसालों को मिलाएं। फिर इसमें 2 लहसुन की कली डालें। इन्हें अच्छी तरह मिक्स करके एक जगह रखें। अब एक हांडी लें, उसमें थोड़ा सा सरसों का तेल डाले (ताकि मटन हांडी में चिपके नहीं) फिर इसमें मैरिनेट किया हुआ मटन हांडी में डाले और फिर इसे ढक्कन से ढकें और इसे आटे की लोई की मदद से सीलबंद कर दें। फिर इसे कोयले की आंच पर एक घंटे के लिए पकने दें। बीच बीच में इसे हाथ से पकड़कर हिलाएं ताकि प्याज और मसाले आपस में अच्छी तरह मिल जाए। जब ये बन जाए तो इसे भूंजा, लिट्टी या फिर रोटी के साथ खाएं और स्वादिष्ट हांडी मटन का लुत्फ उठाएं।
