सावित्रीबाई फुले: भारत की पहली महिला टीचर, शिक्षा से तोड़ी सदियों की बेड़ियां

Savitribai Phule Jayanti: सावित्रीबाई एक क्रांतिकारी कवयित्री भी थीं। उनकी रचना 'काव्य फुले' में वे लिखती हैं, "जाओ, शिक्षा प्राप्त करो, स्वावलंबी बनो।" उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा को 'अंग्रेजी माता' कहा।

Savitribai Phule Birth Anniversary: पुणे की संकरी गलियों में साल 1848 की एक सुबह। एक महिला घर से निकली। हाथ में किताबें और आंखों में अटल आत्मविश्वास था। थोड़ा आगे बढ़ते ही कुछ लोग फुसफुसाने लगे। अचानक किसी का फेंका पत्थर कंधे पर लगा, चेहरे पर कीचड़ उछाला गया, अपशब्दों की बौछार हुई। लेकिन वह णहिला रुकी नहीं। उन्हें पता था कि स्कूल पहुंचकर मैली साड़ी बदलनी होगी। यह महिला थीं सावित्रीबाई फुले। भारत की पहली महिला शिक्षिका और नारी शिक्षा की क्रांतिकारी सावित्रीबाई फुले।

Sawitribai phule

सावित्रीबाई फुले जयंती 2025

3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव गांव में जन्मी सावित्रीबाई का बचपन उस दौर में बीता जब लड़कियों का अक्षर ज्ञान पाप माना जाता था। मात्र 9 साल की उम्र में 13 साल के समाज सुधारक ज्योतिराव फुले से उनकी शादी हुई। ज्योतिराव ने उनकी प्रतिभा पहचानी और घर पर पढ़ाना शुरू किया। सावित्रीबाई जल्दी ही पढ़ी-लिखी हो गईं। ज्योतिराव का मानना था कि समाज बदलना है तो महिलाओं को शिक्षित करना होगा।

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