Rakhi Revolution: जब टैगोर ने राखी को बनाया सबसे ताकतवर हथियार, एक धागे में बंध गया था पूरा बंगाल

टैगोर रास्ते में मिलने वाले हर इंसान, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम, रिक्शावाला हो, मजदूर हो या बड़ा व्यापारी, की कलाई पर राखी बांधते जा रहे थे।

तारीख थी 16 अक्टूबर 1905। कलकत्ता की सड़कों पर रोज जैसी चहल-पहल नहीं थी। माहौल में एक अजीब सी खामोशी थी। उस खामोशी के पीछे सुलग रहा था आंसुओं और आक्रोश का एक ऐसा समंदर, जो कभी भी ज्वालामुखी बन ब्रिटिश हुकुमत पर फट सकता था। मन में गुस्सा लेकिन आंखों में एक अजीब सा संकल्प था। यह वह दिन था जब ब्रिटिश हुकूमत ने बंगाल की आत्मा के दो टुकड़े करने का फरमान लागू किया था।

Rabindranath Tagore Raksha Bandhan Revolution

रबींद्रनाथ टैगोर की राखी क्रांति (AI Image)

विभाजन के इस फरमान और लोगों के आक्रोश के बीच एक 44 साल का दुबला पतला कवि, हाथों में ढेर सारे रेशमी धागे लिए सड़कों पर उतर आया। वह कवि थे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर। उन्होंने अंग्रेजी फरमान के विरोध में एक ऐसा नायाब तरीका निकाला कि ब्रिटिश सरकार भी चौंक गई। उन्होंने राखी को ईंस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ बंगाल का सबसे ताकतवर हथियार बना दिया।

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