कुछ सालों पहले टेलीविजन पर रणबीर कपूर एक पेंट कंपनी का ऐड करते थे।वह टीवी कमर्शियल खूब पॉपुलर हुआ था। इसमें रणबीर कपूर ऐसा गाना गाते हैं कि शादी समारोह पूरी तरह से तहस-नहस हो जाता है। रणबीर ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उनका प्यार किसी और से शादी कर रहा होता है। लेकिन शादी रोकने के लिए बारिश करवाना, मानो बादल रणबीर के निर्देश के इंतजार में थे कि कब वो कहें और हम बरसें। क्या आपको लगता है कि ऐसा हो सकता है? या क्या ऐसा पहले कभी हुआ होगा? जी हां, ऐसा हो सकता है। दरअसल बारिश करवाने की ताकत रणबीर कपूर में नहीं उस राग में थी जो वो गा रहे थे। ये राग था मल्हार।
कहानी राग मल्हार की (Photo: AI Image)
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भारतीय संगीत की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसके सारे सुर और राग पल, घड़ी, दिन और मौसम के हिसाब से रचे गए हैं। किस वक्त या किस मौसम में किस राग को गाना है यह भारतीय संगीत के पंडितों को बखूबी पता होता है। राग मल्हार का संबंध बरसात के मौसम से है। मल्हार का अर्थ ही है बारिश या वर्षा। यह राग सिर्फ सुनने में नहीं, महसूस करने में भी बरसात की ठंडी फुहारों जैसा है। ऐसा माना जाता है कि मल्हार गाने से बारिश हो जाती है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होता है? इस राग की शुरुआत कब हुई? इसे कैसे गाया जाता है? और क्या है इसकी विधा? आइए इन सारे सवालों के जवाब जानने का कोशिश करते हैं।
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जब तानसेन ने पहली बार छेड़ा राग मल्हार
मल्हार राग भारतीय संगीत परंपरा की प्राचीन धरोहर है। राग मल्हार के जन्म के कई किस्से और कहानियां प्रचलित हैं। सबसे लोकप्रिय कहानी महान संगीतज्ञ तानसेन से जुड़ी है। तानसेन अकबर के नवरत्नों में शामिल थे। किसी रोज तानसेन के बारे में किसी ने अकबर से कह दिया कि वह जब राग दीपक गाते हैं तो दिये जलने लगते हैं। अकबर ने फरमान सुनाया कि यह करिश्मा उन्हें भी दिखाएं। कहा जाता है कि तानसेन ने दीपक राग गाया और दिये जल उठे।
दीपक राग में सुरों की संरचना इस प्रकार है कि गायक के शरीर में गर्मी उत्पन्न हो जाती है। यही गर्मी वातावरण में भी आ जाती है और कई बार आग लग जाती है। दीपक राग की इसी गरम तासीर को कम करने के लिए तानसेन ने मेघ-मल्हार राग की रचना की थी। अब इसे इत्तेफाक कहें या करिश्मा कि जब तानसेन ने राग मल्हार गाया तो बारिश होने लगी। तभी से ये प्रचलित हो गया कि राग मल्हार गाने से बारिश होती है। इसे राग मेघ मल्हार भी कहा जाता है।
राग मल्हार का परिचय (Photo: iStock)
क्या सच में राग मल्हार गाने से होती है बारिश
राग मल्हार की कई खूबियां हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत तो यह है कि इसके सुरों में ठहराव और तरलता ठीक वैसे ही होती है जैसे बारिश की कोई पहली बूंद जमीन से टकराती है और मन को ठंडक पहुंचाती है। इस राग में ऐसा जादू है कि इसे सुनते ही ताजगी और सुकून सा महसूस होता है। शायद यही वजह है कि इसे गाने के लिए एक खास भाव और अनुभव की जरूरत होती है।
हालांकि विज्ञान इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता है कि राग मल्हार गाने से बारिश हो जाती है लेकिन इस राग का जादू भावात्मक और मनोवैज्ञानिक तौर पर सावन की फुहारों में भिगोने के लिए काफी है। संगीत के जानकार मानते हैं कि यह राग एक तरह से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और प्रकृति से जुड़ाव का अनुभव कराता है।
केंद्रीय विद्यालय से रिटायर हो चुके संगीत के टीचर पी व्यास बताते हैं कि जब कोई गायक मल्हार गाता है या कोई इसे सुनता है तो उसका मन मानो किसी भीषण गर्मी के बाद पहली बारिश की राहत में भीग जाता है। यह राग गाने और सुनने वाले के मन की बेचैनी को कुछ देर के लिए शांत कर देता है। राग मल्हार का सही असर तभी होता है जब इसे सही तरीके से गाया जाए।
राग मल्हार के प्रकार
कैसे गाया जाता है राग मल्हार
पहले समय में जब संगीत की महफिलें सजती थीं तो शाम को शुरू होकर सुबह तक चलती थीं। तब प्रहर के अनुसार अलग-अलग राग गाए जाते थे।राग मल्हार को रात के दूसरे पहर में गाया जाता है। इसे गाने में ठहराव और संयम की जरूरत होती है। यह राग खयाल, ध्रुपद, तराना, ठुमरी समेत कई दूसरी शैलियों में भी गाया जाता है। गायन की शुरुआत आलाप से होती है, जिसमें सुरों का विस्तार किया जाता है। इसके बाद बंधी हुई बंदिशों के साथ ताल और लय का मेल बैठाया जाता है। मल्हार का प्रभाव तभी साकार होता है जब गायक भावनाओं के साथ सुरों को आत्मसात करता है।
राग मल्हार गाने के माहिर कई भारतीय कलाकारों ने अपनी कला से इस राग की मधुरता और भाव को अमर बनाया है। चाहे वह पंडित भीमसेन जोशी की गहरी आवाज हो या पंडित रवि शंकर का सितार, इन कलाकारों ने मल्हार को भारतीय संगीत की अनमोल धरोहर बनाए रखा और आने वाली पीढ़ियों को संजो कर दिया है।
मानसून के राग मल्हार के उस्ताद (Photo: iStock)
मानसिक स्वास्थ्य भी सुधारता है मानसून का राग मल्हार
यह तो विज्ञान भी मानता है कि संगीत का हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। संगीत भी एक तरह का योग है जो हमें निरोग रखने में मदद करा है। राग मल्हार का सबसे बड़ा फायदा मानसिक स्वास्थ्य को होता है। इसके कोमल स्वर और गंभीर रस तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में मदद करते हैं। माना जाता है कि मल्हार के स्वर हृदय गति को स्थिर करते हैं और रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक हैं। दावा किया जाता है कि मल्हार की मधुर लय मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स बढ़ाती है, जो स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल को कम करता है।
बॉलीवुड को भी खूब भाया राग मल्हार
राग मल्हार के जादू से फिल्मी दुनिया भी अछूती नहीं रही। बॉलीवुड हो या फिर बंगाली और दक्षिण भारतीय सिनेमा, हर जगह राग मल्हार को बड़ी खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया। मधुर और शांत राग होने के कारण कई बार इस राग में विरह का भी वर्णन होता है। जब बादल बरसते हैं, तब प्रीतम से दूर प्रेयसी के मन से हूक निकलती है कि आ लौट के आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं। संगीतकार मदन मोहन, नौशाद से लेकर शंकर महादेवन और ए आर रहमान तक ने अपने संगीत में राग मल्हार से ऐसे सुर बिखेरे कि सुनने वाले बस मदमस्त हो गए।
(Photo: Mother India Movie)
राग मल्हार के सबसे नायाब फिल्मी गीतों में शामिल है फिल्म चित्रलेखा(1964) का गाना काहे तरसाए जियरा। रोशन के संगीत और आशा भोंसले की आवाज से सजा यह गाना प्रेम और वियोग के भाव को राग मल्हार की स्वर संगतियों के साथ खूबसूरती से पेश करता है।
1949 में आई फिल्म बरसात का मशहूर गीत बरसात में हमसे मिले तुम सजन भी राग मल्हार का सटीक उदाहरण है। इस गीत को संगीत से सजाया था शंकर जय किशन और आवाज का जादू बिखेरा था लता मंगेशकर और मुकेश ने। राग मियां मल्हार की मिठास में लिपटा यह गीत बारिश की रिमझिम और प्रेम के भाव का संगम है।
मल्हार की मेलोडी (Photo: Raavan Movie)
आधुनिक काल में मल्हार रागों का प्रयोग फ्यूजन संगीत में भी किया गया है। आज के कई संगीतकारों ने मल्हार को वेस्टर्न म्यूजिक के साथ मिलाकर नए प्रयोग भी किए हैं। ताजा उदाहरण बैंडिश बैंडिट्स नाम की वेब सीरीज में साफ देखा जा सकता है। शंकर महादेवन ने काफी खूबसूरती से राग मल्हार को नए कलेवर में पेश किया है।
राग मल्हार को भारतीय शास्त्रीय संगीत का वह अनमोल रत्न कहा जा सकता है जो प्रकृति और इंसान के बीच पुल का काम करता है। राग मल्हार ने हर युग में अपना जादू चलाया है। यह भले बादल ना बरसाता हो लेकिन मन को ऐसी राहत देता है कि तनाव जैसे विकार अपने आप धुल जाते हैं। आज डिजिटल म्युजिक के शोर में जहां कई तरह का पारंपरिक संगीत दम तोड़ चुका है, वहीं राग मल्हार अब भी अपने वजूद को बचाए हुए है।
Photo: AI Image
तानसेन, मीरा, पंडित भीमसेन जोशी, किशोरी अमोनकर जैसे संगीत के महान पंडितों ने इसे अमर बनाया तो वहीं दूसरी तरफ बॉलीवुड ने इसे लोगों तक पहुंचाया। फिर भी, युवा पीढ़ी में शास्त्रीय संगीत की समझ कम होना चिंता का विषय है। इसे संजोना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि यह सांस्कृतिक धरोहर हमेशा बरसती रहे।
