कहानी राग मल्हार की: मानसून की मधुर पुकार कैसे बना मल्हार, क्या सच में बारिश करा देता है यह राग

पहले समय में जब संगीत की महफिलें सजती थीं तो शाम को शुरू होकर सुबह तक चलती थीं। तब प्रहर के अनुसार अलग-अलग राग गाए जाते थे।राग मल्हार को रात के दूसरे पहर में गाया जाता है। इसे गाने में ठहराव और संयम की जरूरत होती है।

कुछ सालों पहले टेलीविजन पर रणबीर कपूर एक पेंट कंपनी का ऐड करते थे।वह टीवी कमर्शियल खूब पॉपुलर हुआ था। इसमें रणबीर कपूर ऐसा गाना गाते हैं कि शादी समारोह पूरी तरह से तहस-नहस हो जाता है। रणबीर ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उनका प्यार किसी और से शादी कर रहा होता है। लेकिन शादी रोकने के लिए बारिश करवाना, मानो बादल रणबीर के निर्देश के इंतजार में थे कि कब वो कहें और हम बरसें। क्या आपको लगता है कि ऐसा हो सकता है? या क्या ऐसा पहले कभी हुआ होगा? जी हां, ऐसा हो सकता है। दरअसल बारिश करवाने की ताकत रणबीर कपूर में नहीं उस राग में थी जो वो गा रहे थे। ये राग था मल्हार।

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कहानी राग मल्हार की (Photo: AI Image)

(फोटो सोर्स: Asian Paints You Tube)

भारतीय संगीत की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसके सारे सुर और राग पल, घड़ी, दिन और मौसम के हिसाब से रचे गए हैं। किस वक्त या किस मौसम में किस राग को गाना है यह भारतीय संगीत के पंडितों को बखूबी पता होता है। राग मल्हार का संबंध बरसात के मौसम से है। मल्हार का अर्थ ही है बारिश या वर्षा। यह राग सिर्फ सुनने में नहीं, महसूस करने में भी बरसात की ठंडी फुहारों जैसा है। ऐसा माना जाता है कि मल्हार गाने से बारिश हो जाती है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होता है? इस राग की शुरुआत कब हुई? इसे कैसे गाया जाता है? और क्या है इसकी विधा? आइए इन सारे सवालों के जवाब जानने का कोशिश करते हैं।

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