Priyanka Chopra Parenting Tips: विदेश में बच्चे की परवरिश करते हुए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ अच्छी पढ़ाई या बेहतर सुविधाएं देना नहीं होती, बल्कि उसे अपनी जड़ों से जोड़े रखना भी होता है। यही वजह है कि कई भारतीय माता-पिता घर से दूर रहकर भी बच्चों को अपनी संस्कृति, भाषा, खान-पान और पारिवारिक परंपराओं से परिचित कराने की कोशिश करते हैं। अभिनेत्री और ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा भी अपनी बेटी मालती मैरी के साथ ऐसे ही छोटे-छोटे पल साझा करती नजर आती हैं।
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उनके परिवार की झलकियों में भारतीय परंपराओं और परिवार से जुड़ाव की बातें अक्सर ध्यान खींचती हैं। इससे एक दिलचस्प सवाल उठता है, अगर बच्चा विदेश में बड़ा हो रहा है तो उसे अपनी जड़ों से कैसे जोड़ा जाए? न केवल विदेश में बल्कि आज कल के दौर में भारत में रहकर भी बच्चे अपनी संस्कृति से दूर होते नजर आ रहे हैं। ऐसे में बच्चों के लिए किसी बड़े नियम की जरूरत नहीं। रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें ही बच्चे को अपनी संस्कृति के करीब ला सकती हैं और उसे यह समझ दे सकती हैं कि आधुनिक दुनिया में रहते हुए भी अपनी पहचान को साथ रखना खूबसूरत बात है।
1. दादा-दादी और बड़ों का सम्मान सिखाएं
बच्चों को बड़ों की इज्जत करना किसी एक दिन में नहीं सिखाया जा सकता। यह रोज के व्यवहार से आता है। दादा-दादी या नाना-नानी से फोन पर बात कराना, उनका हाल पूछना और उनके साथ कुछ समय बिताना बच्चे के लिए छोटा लेकिन यादगार अनुभव हो सकता है। अगर बच्चा विदेश में रहता है, तब भी वीडियो कॉल के जरिए परिवार से उसका रिश्ता मजबूत रखा जा सकता है। उसे यह समझाना जरूरी है कि परिवार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे की परवाह करने का रिश्ता है।
2. भारतीय खाने से कराएं दोस्ती
बच्चे को अपनी संस्कृति से जोड़ने का एक मजेदार तरीका खाना भी हो सकता है। घर में कभी दाल-चावल, रोटी-सब्जी, खिचड़ी या कोई पारंपरिक मिठाई बनाकर बच्चे को उसके बारे में बताएं। सिर्फ खाना खिलाने के बजाय उसकी कहानी भी सुनाएं। जैसे कोई डिश किस त्योहार पर बनती है या घर में इसे किस तरह बनाया जाता था।
3. पूजा और मंत्र को बनाएं रूटीन का हिस्सा
घर में पूजा हो तो बच्चे को साथ बैठने दें। छोटे मंत्र या प्रार्थना की कुछ पंक्तियां प्यार से सिखाई जा सकती हैं। इसका उद्देश्य बच्चे पर धार्मिक दबाव डालना नहीं, बल्कि परिवार की परंपराओं से परिचित कराना होना चाहिए।
बच्चे को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए घर में हर समय बड़े-बड़े संस्कारों की बातें करने की जरूरत नहीं। ये छोटी चीजें धीरे-धीरे बच्चे की पहचान का हिस्सा बन सकती हैं।
