One Pot Food Trend: रसोई में खाना बनाना कई बार इसलिए भारी लगने लगता है क्योंकि गैस जलाने से पहले ही ढेर सारी तैयारी करनी पड़ती है। फिर खाना बनने के बाद झूठे बर्तनों का अंबार और लंबी सफाई। अगर उसी दिन मेड भी छुट्टी पर हो तो परेशानी और बढ़ जाती है। इसी समस्या के समाधान के तौर पर उभर रहा है वन पॉट फूड ट्रेंड। यानी एक ही बर्तन में एक पूरा मील तैयार कर लेना।
इन दिनों सोशल मीडिया खोलिए तो कहीं वन पॉट पास्ता बन रहा है, कहीं वेज पुलाव, कहीं दलिया तो कहीं खिचड़ी का नया फ्यूजन अवतार। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर One Pot Meal सबसे तेजी से बढ़ते फूड ट्रेंड्स में शामिल है। इसका अर्थ है कम समय, कम मेहनत और कम बर्तनों में तैयार होने वाला स्वादिष्ट खाना। दिलचस्प बात यह है कि यह ट्रेंड सिर्फ दिखावे का नहीं है। बल्कि लोग सच में इससे खुद को जोड़कर देखा पा रहे हैं और इन डिशेज को आजमा भी रहे हैं।
वन पॉट ट्रेंड वायरल क्यों हुआ
कोरोना महामारी के बाद घर पर खाना बनाने की आदत बढ़ी, लेकिन लोगों की व्यस्त दिनचर्या कम नहीं हुई। ऐसे में सोशल मीडिया पर ऐसी रेसिपीज तेजी से लोकप्रिय हुईं जो कम समय में तैयार हो जाएं, कम बर्तन गंदे करें और पोषण भी दें। यही वजह है कि वन पॉट फूड धीरे-धीरे एक कुकिंग स्टाइल से बढ़कर लाइफस्टाइल ट्रेंड बन गया।
वन पॉट मील का ट्रेंड क्यों हुआ पॉपुलर
One Pot Food आखिर क्या है
कम मेहनत और झंझट के एक समय का पूरा खाना एक ही कड़ाही या कूकर में बनकर तैयार करना - ये है वन पॉट फूड का बेसिक कॉन्सेप्ट। जैसा कि नाम से ही साफ है कि ऐसा भोजन, जो शुरुआत से लेकर आखिर तक एक ही बर्तन में तैयार हो जाए। यानी सब्जियां काटीं, मसाले डाले, चावल या पास्ता मिलाया, पानी डाला और पकने दिया। अलग-अलग कड़ाही, कुकर या पैन बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
कुछ लोग इसे 'आलसी लोगों की कुकिंग' कहकर मजाक भी उड़ाते हैं। लेकिन जो रोज समय से जूझते हैं, उनके लिए यह किसी लाइफ हैक से कम नहीं। और तभी तो एक ही बर्तन में तैयार होने वाली पूरी रेसिपी जैसे कि खिचड़ी, पुलाव, दलिया, पास्ता, ओट्स, मिलेट बाउल, स्ट्यू, सूप और यहां तक कि कई तरह की बिरयानी बनाने का तरीका भी इसी ट्रेंड के चलते पॉपुलर हो रहा है। राजमा चावल, कढ़ी चावल और छोले चावल तक के वन पॉट रेसिपी ऑप्शंस सामने आ रहे हैं।
समय की कमी ने बदल दी किचन की सोच
वन पॉट फूड दरअसल उस लाइफस्टाइल की जरूरत बन गया है जहां ज्यादातर परिवारों में पति-पत्नी दोनों काम करते हैं। सुबह ऑफिस की जल्दी, बच्चों का टिफिन, स्कूल और ट्रैफिक के बीच हर मिनट की कीमत है। लेकिन ये वो लोग हैं जो सेहत और बजट - दोनों के लिहाज से घर के खाने की अहमियत भी समझते हें। यहीं से निकला है 20-30 मिनट में तैयार होने वाली ऐसी रेसिपीज का चलन - जो आसानी से बनती हैं, पूरा पोषण देती हैं और पेट भी भरा रखती हैं।
वन पॉट फूड इसी जरूरत को पूरा करता है। इसमें बार-बार गैस के सामने खड़े रहने की जरूरत नहीं होती। नई दिल्ली में बैंकिंग सेक्टर में काम करने करने वाली दीप्ति शर्मा ने बताया कि सुबह 7 से 8 बजे का टाइम ऐसा जल्दबाजी का होता है कि रोटी, सब्जी, दाल, चावल, सलाद - वाला खाना बनाने और पैक करने का समय नहीं बचता। लेकिन वन पॉट फूड ने मेरी मुश्किल काफी आसान कर दी है। अगर हेल्पर ना भी आए तो एक वेज दलिया, पुलाव या खिचड़ी बनाने के तमाम विकल्प देखते हुए अब परेशानी कम होती है।
वहीं हाउसवाइफ निकी सिंह का कहना है कि उनकी लाइफ में वन पॉट फूड वीकेंड के लिए बेस्ट ऑप्शन है। एक बार सामग्री डालने के बाद बाकी काम पकने का इंतजार भर रह जाता है। इससे मुझे पूरा दिन किचन में नहीं लगना पड़ता, मेड की किचकिच भी कम होती है और परिवार के साथ आउटिंग का प्लान भी बन जाता है।
'आज क्या बनाऊं' वाली टेंशन भी हुई कम
वन पॉट फूड सिर्फ समय और मेहनत ही नहीं बचाता, बल्कि रोज होने वाली एक और बड़ी उलझन भी कम कर देता है। कई गृहिणियां और नौकरीपेशा महिलाएं मानती हैं कि खाना बनाना जितना मुश्किल नहीं होता, उससे ज्यादा थकाने वाला हर सुबह यह तय करना होता है कि आज क्या बनाया जाए। पोषण, स्वाद, बच्चों की पसंद और समय - इन सबके बीच फैसला लेना आसान नहीं होता। इसे मनोविज्ञान की भाषा में 'डिसीजन फटीग' (Decision Fatigue) भी कहा जाता है। वन पॉट रेसिपीज इस समस्या को काफी हद तक कम कर देती हैं। सीमित सामग्री में जल्दी बनने वाले कई विकल्प होने से रोज की यह कंफ्यूजन भी कम होने लगती है
दीप्ति शर्मा कहती हैं कि वन पॉट मील उनके लिए सबसे बड़ी राहत सिर्फ खाना जल्दी बनना नहीं, बल्कि रोज सुबह 'आज क्या बनाऊं?' वाली उलझन से बाहर निकलना भी है।
अब मेन्यू तय करना भी हुआ आसान!
कम बर्तन, कम सफाई... यही सबसे बड़ा प्लस पॉइंट
वैसे कई लोगों के लिए खाना बनाना मुश्किल नहीं होता, बल्कि उसके बाद बर्तन साफ करना ज्यादा थकाने वाला काम लगता है। वन पॉट रेसिपी इस परेशानी को काफी हद तक कम कर देती है। एक ही पतीला, कुकर या पैन इस्तेमाल होने से सिंक में बर्तनों का ढेर नहीं लगता। यही वजह है कि यह ट्रेंड खासकर युवा, बैचलर्स और छोटे परिवारों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है।
दीप्ति और निकी की बातें भी इसी ओर इशारा करती हैं कि वन पॉट मील से गृहणियों को मेड के नखरों से भी कुछ हद तक राहत मिली है। वहीं गर्मी और उमस के मौसम में जब रसोई में ज्यादा देर खड़े रहने का मन नहीं करता है तो कम समय में तैयार होने वाला गर्मागर्म खाना परिवार के लिए आसान विकल्प बन जाता है।
शायद यही वजह है कि कई लोग मजाक में कहते हैं कि वन पॉट रेसिपी उस दिन सबसे ज्यादा काम आती है, जब मेड छुट्टी पर हो। एक ही बर्तन में पूरा खाना तैयार हो जाने से रसोई का आधा काम अपने आप कम हो जाता है और बाद में सफाई का झंझट भी काफी घट जाता है।
बैचलर्स का पसंदीदा तरीका
वैसे लेडीज ही नहीं, बैचलर्स के लिए भी वन पॉट फूड घर से दूर रहकर जल्दी और आसानी से कुछ बनाने का अच्छा तरीका है। हमारे सहयोगी शिशुपाल शर्मा पुराने दिन याद करते हुए बताते हैं कि बैचलर डेज में पढ़ाई और तैयारी के बीच दाल, चावल और चोखा इसलिए पसंद था कि सारा खाना एक बर्तन में रेडी हो जाता था। इससे पैसे और समय - दोनों की बचत होती थी और स्वाद भी भरपूर मिलता था। मित्र मंडली के साथ ऐसा खाना - किसी भी मॉडर्न पार्टी से ज्यादा मजेदार था।
सोशल मीडिया ने बना दिया सुपरस्टार
अगर पिछले कुछ महीनों के इंस्टाग्राम फूड ट्रेंड्स पर नजर डालें तो वन पॉट रेसिपीज की भरमार दिखाई देती है। वजह भी साफ है। 30 सेकंड की रील में पूरी रेसिपी दिख जाती है। सभी सामग्री एक-एक करके बर्तन में डालिए, ढक्कन लगाइए और आखिर में तैयार खाना दिखा दीजिए। देखने में आसान, बनाने में आसान और शेयर करने में भी आसान। यही वजह है कि फूड क्रिएटर्स से लेकर होम शेफ तक लगातार नए-नए वन पॉट एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं।
हेल्दी खाना बनाना भी हुआ आसान
वन पॉट का मतलब सिर्फ इंस्टेंट या जंक फूड नहीं है। एक वेट लॉस बेस्ड एप के साथ जुड़ीं डाइटिशियन नैना साहनी कहती हैं कि वन पॉट मील तभी संतुलित माना जाएगा, जब उसमें कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन, हरी सब्जियां और पर्याप्त फाइबर भी शामिल हों। सिर्फ पास्ता या चावल से बना भोजन पेट तो भर सकता है, लेकिन पोषण के लिहाज से हमेशा पर्याप्त नहीं होता।
जाहिर है कि इससे कम तेल में भी स्वादिष्ट भोजन तैयार हो जाता है, जिससे यह हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच भी पसंद किया जा रहा है।
स्वाद भी और न्यूट्रिशन भी ... एक ही बर्तन में है मुमकिन
सिर्फ सुविधा नहीं, बचत का भी मामला है
कम गैस, कम तेल, कम बर्तन और कम समय - इन चारों का सीधा असर घर के बजट पर भी पड़ता है। अलग-अलग व्यंजन बनाने की तुलना में एक संतुलित वन पॉट मील कम संसाधनों में तैयार हो जाता है। यही कारण है कि छात्र, नौकरीपेशा लोग और छोटे परिवार इसे अपनी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का हिस्सा बना रहे हैं।
वहीं इससे खाने की बर्बादी भी कम होती है। जैसे कि बचे हुए चावल फ्राइड राइस के तौर पर प्रयोग में लाए जा सकते हैं।
मील प्रेप करने वालों की भी पहली पसंद
आजकल 'मील प्रेप' यानी पहले से खाना तैयार करके रखने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। खासकर नौकरीपेशा लोग और छात्र रविवार को एक या दो वन पॉट मील बनाकर उन्हें छोटे-छोटे हिस्सों में स्टोर कर लेते हैं। अगले दिन यही खाना ऑफिस के टिफिन में पैक हो जाता है या जरूरत पड़ने पर सिर्फ गर्म करके खाया जा सकता है।
इससे रोज नया खाना बनाने का दबाव कम होता है और बाहर से खाना मंगाने की जरूरत भी काफी हद तक घट जाती है। यही वजह है कि फिटनेस फॉलो करने वाले, जिम जाने वाले और कैलोरी ट्रैक करने वाले लोग भी वन पॉट मील को अपनी डाइट का हिस्सा बना रहे हैं।
क्या हर वन पॉट रेसिपी हेल्दी होती है
वन पॉट रेसिपी बेशक हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करने के एक तरीके तौर पर उभरा है लेकिन जरूरी नहीं कि इस ट्रेंड में शामिल हर रेसिपी हेल्दी ही हो। अगर इसमें जरूरत से ज्यादा चीज़, बटर, क्रीम, प्रोसेस्ड सॉस या इंस्टेंट मसालों का इस्तेमाल किया जाए तो कैलोरी और सोडियम दोनों बढ़ सकते हैं। इसलिए सिर्फ 'वन पॉट' लिखा होने भर से कोई रेसिपी हेल्दी नहीं हो जाती बल्कि इनका हेल्थ मीटर इनमें लगने वाली सामग्री और इनको बनाने का तरीका तय करता है।
ऐसे में बेहतर होगा कि घर पर ताजी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और सीमित तेल का इस्तेमाल करके वन पॉट मील तैयार किया जाए।
भारतीय रसोई के लिए नया नहीं, बस नया नाम
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय घरों में वन पॉट कुकिंग कोई नई चीज नहीं है। अगर नाम हटा दें तो हमारी दादी-नानी की रसोई में बनने वाली खिचड़ी, तहरी और दलिया भी वन पॉट कुकिंग का ही हिस्सा रही हैं।
यानी भारतीय रसोई वर्षों पहले से वन पॉट कुकिंग करती आ रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि सोशल मीडिया ने इसे नया नाम और नई पहचान दे दी है। वैसे पश्चिमी देशों में इस ट्रेंड के तहत वन पॉट पास्ता और कैसरोल लोकप्रिय हैं।
क्या यह सिर्फ ट्रेंड है या आदत बनने वाला तरीका
फूड ट्रेंड्स अक्सर कुछ महीनों में बदल जाते हैं, लेकिन वन पॉट फूड की लोकप्रियता सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। यह समय बचाने, बजट संभालने और रोजमर्रा की रसोई को आसान बनाने का तरीका बन चुका है।
कह सकते हैं कि वन पॉट फूड सिर्फ एक वायरल रेसिपी ट्रेंड नहीं, बल्कि बदलती लाइफस्टाइल का ऐसा समाधान है जो स्वाद, सुविधा और समय - तीनों का संतुलन एक ही बर्तन में परोस देता है। शायद यही वजह है कि इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में भी इसके कम होने की संभावना कम ही दिखाई देती है।
