पिता ने दी थी कभी ना गा पाने की 'बद्दुआ', फिर कैसे सुरों के शहंशाह बने नुसरत फतेह अली खान

Nusrat Fateh Ali khan: नुसरत साहब ने अपने तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में संगीत का इतना बड़ा संसार रच दिया कि उनकी गायकी के बिना आज भी सूफी संगीत य् कव्वाली की कोई महफिल नहीं सजती है।

Nusrat Fateh Ali Khan Birth Anniversary: दुनिया जब भी कव्वाली और रूहानी संगीत का जिक्र करती है, तो जुबां पर सबसे पहला नाम उस्ताद नुसरत फतेह अली खान का आता है। उनकी आवाज में एक ऐसा जादू और कशिश थी, जो शब्दों की सरहदें लांघकर सीधे रूह को छू लेती थी। उन्हें 'शहंशाह-ए-नकावत' यानी कव्वाली का सम्राट यूं ही नहीं कहा जाता था।

Nusrat Fateh Ali khan

नुसरत फतेह अली खान कैसे बने कव्वाली के सबसे बड़े उस्ताद

उनकी आवाज का जादू कुछ ऐसा था कि लोग कव्वाली सुनते-सुनते वक्त का होश खो बैठते थे। उनके छेड़े गए सुरों में कभी इबादत का सुकून मिलता, तो कभी इश्क की ऐसी बेचैनी कि सुनने वाला खुद को रोक नहीं पाता था। वैसे बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस शख्स की आवाज से पूरी कायनात गूंज उठी, उनके बचपन में एक ऐसा दौर भी आया था जब संगीत उनके लिए किसी सजा या नापसंद चीज की तरह थी।

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