कभी खतरनाक हेड हंटर्स की थी पहचान, अब Oscar पहुंची सिर काट लेने वाले कोन्याकों की दास्तान

नागालैंड के फिल्ममेकर तेजा रियो की फिल्म आंग 1960 के दशक के कोन्याक समाज में हुए बड़े सामाजिक फेरबदल की कहानी है। भारत की तरफ से इस फिल्म को इस साल Oscars के लिए भेजा गया है।

नागालैंड के घने जंगल और जंगलों के बीच एक सुनसान गांव। कभी इस गांव में जिंदगी हुआ करती थी, घरों में चूल्हे जलते थे, बच्चे खेलते थे और गांव की अपनी दुनिया थी। अब गांव लगभग खाली हो चुका है। कुछ लोग नई बस्ती में चले गए हैं। उनके साथ नई आस्था, नए कपड़े, नया जीवन और एक नया भविष्य जुड़ गया है। पीछे रह गया है एक बुजुर्ग शख्स, उसकी बीमार पत्नी और जवान बेटा। इन्हीं तीनों के इर्द-गिर्द घूमती है फिल्म आंग (Angh) की कहानी।

Angh Oscars

ऑस्कर पहुंचा दिखेगा कोन्याक नागा समाज का पुराना दर्द (AI Generated and newsroom verified image)

नागालैंड के फिल्ममेकर तेजा रियो की फिल्म आंग 1960 के दशक के कोन्याक समाज में हुए बड़े सामाजिक फेरबदल की कहानी है। भारत की तरफ से इस फिल्म को इस साल Oscars के लिए भेजा गया है। कहानी नागालैंड के कोन्याक नागा समाज और वहां के आंगों पर बुनी गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कोन्याक नागा कोन होते हैं? इनके यहां आंग किन्हें कहा जाता है? आइए विस्तार से समझते हैं:

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