Lohri se humein kya seekh milti hai (Good motivational thought for Today): 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है। दिन में शाम के उत्सव की तैयारी और सूरज डूबने के बाद अलाव के आसपास परिवार और दोस्तों का साथ। मन में जमी बर्फ को पिघलाने, रिश्तों में गर्माहट लाने और पुराना छोड़कर नए को अपनाने - यही तो है लोहड़ी के त्योहार का जीवन संदेश।
लोहड़ी से हमें क्या सीख मिलती है
लोहड़ी की परंपराओं पर थोड़ा सा बैठकर सोचेंगे तो पाएंगे कि यह सिर्फ आग जलाने का पर्व नहीं है। यह छोड़ने और आगे बढ़ने का उत्सव है। सर्दियों की ठिठुरन के बीच जलती हुई लोहड़ी की आग हमें एक गहरा जीवन-संदेश देती है—जो पीछे छूट जाना चाहिए, उसे थामे रखना प्रगति को रोक देता है।
लोहड़ी की अग्नि में लोग तिल, गुड़ और मूंगफली अर्पित करते हैं। प्रतीक रूप में यह पुरानी फसल, बीते मौसम और बीते संघर्षों को विदा करने का संकेत है। किसान जानता है कि नई फसल तब तक नहीं उगेगी, जब तक खेत पुरानी परतों से मुक्त न हो। यही नियम जीवन पर भी लागू होता है। जब तक हम बीती असफलताओं, टूटे रिश्तों, पुराने डर और नकारात्मक सोच को पकड़कर बैठे रहते हैं, तब तक आगे बढ़ने का रास्ता बंद रहता है।
लोहड़ी हमें सिखाती है कि छोड़ना हार नहीं, समझदारी है। हर अधूरा सपना, हर गलत फैसला और हर बीता हुआ दर्द हमें कुछ न कुछ सिखाकर जाता है। लेकिन उनसे चिपके रहना हमें कमजोर बनाता है। जो इंसान सीख लेकर आगे बढ़ जाता है, वही सच में मजबूत बनता है।
इस पर्व की एक खास बात यह भी है कि लोहड़ी अकेले नहीं मनाई जाती। आग के चारों ओर लोग इकट्ठा होते हैं, गीत गाते हैं, हंसते हैं। यह बताता है कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए साथ, संवाद और साझा खुशी भी उतनी ही जरूरी है। जब हम बोझ छोड़ते हैं, तब दूसरों के लिए जगह बनती है - नए रिश्तों, नए विचारों और नई संभावनाओं के लिए।
लोहड़ी भविष्य की फसल का उत्सव है। यह आज की मेहनत और कल की उम्मीद के बीच पुल बनाती है। लोहड़ी का संदेश साफ है कि जो आज छोड़ देगा, वही कल पा सकेगा। पुरानी सोच, आलस्य और डर की राख से ही आत्मविश्वास और सफलता की नई फसल उगती है।
आज लोहड़ी की आग में सिर्फ तिल-गुड़ ही नहीं, अपने भीतर का डर, पछतावा और संदेह भी समर्पित कर दें। क्योंकि सच यही है - जो छोड़ना सीख लेता है, वही आगे बढ़ता है।
