इस मशहूर शख्स ने डिजाइन किया था इंदिरा गांधी का वेडिंग कार्ड, इकलौती बेटी के लिए नेहरू ने दी थी जिम्मेदारी

पंडित नेहरू चाहते थे कि शादी का कार्ड ऐसा हो जो सादगी के बावजूद सुंदर हो, जिस पर हमारी अपनी माटी की खुशबू आए और जिस पर स्वदेशी आंदोलन का पक्का रंग चढ़ा हो।

किस्सा मार्च 1942 के उन शुरुआती दिनों का है, जब पूरा देश आजादी के परवानों के नारों और इंकलाब की गूंज से थर्रा रहा था। हर तरफ स्वतंत्रता संग्राम की बानगी थी। ऐसे में, देश के सबसे बड़े राजनेता और आधुनिक भारत के निर्माता पंडित जवाहरलाल नेहरू के घर यानी इलाहाबाद के मशहूर आनंद भवन में एक अलग ही रंगत और हलचल मची थी। दरअसल उनकी इकलौती बेटी इंदिरा प्रियदर्शिनी का विवाह फिरोज़ गांधी के साथ तय होना। 26 मार्च 1942 को शादी की तारीख निकली थी।

Indira Wedding

जानिए इंदिरा गांधी के वेडिंग कार्ड और उसके डिजाइन के पीछे की सोच का पूरा किस्सा (AI Generated and Newsroom Verified Image)

शादी में मेहमानों को बुलाने के लिए निमंत्रण कार्ड छपवाना था। आप अंदाजा ही लगा सकते हैं कि देश के सबसे रसूखदार और प्रभावशाली परिवार में शादी हो, तो मेहमानों की लिस्ट और ठाठ-बाट कैसा होगा? ज्यादातर लोगों के मन में यही होगा कि इस शादी के लिए कोई शाही या विदेशी स्टाइल का भड़कीला निमंत्रण पत्र छपा होगा। हालांकि पंडित नेहरू की सोच एकदम हटकर थी। Selected Works of Jawaharlal Nehru, First Series, Vol. 12 के मुताबिक वे चाहते थे कि शादी का कार्ड ऐसा हो जो सादगी के बावजूद सुंदर हो, जिस पर हमारी अपनी माटी की खुशबू आए और जिस पर स्वदेशी आंदोलन का पक्का रंग चढ़ा हो।

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