Ibadat Shayari in Hindi: इबादत बेहद पवित्र लफ्ज़ है। इबादत सिर्फ खुदा की नहीं होती। महबूब की भी होती है। माता-पिता की भी होती है। इबादत ऐसी भावना है जिसे हम बिना शब्दों के बयां करते हैं। फिर भा तमाम शायरों ने इस इबादत को अपने ही तरीके से बयां किया है। देश दुनिया का कई मशहूर शायरों में इबादत पर एक से बढ़कर एक मशहूर शेर लिखे हैं। शायरों ने माना है कि इश्क और इबादत, दोनों दुनिया की सबसे हसीन क्रिया है। इश्क में इबादत होती है और इबादत में इश्क होता है। दोनों एक दूसरे के पूरक भी है। बिना इबादत इश्क अधूरा रहता है तो बिना इश्क आप इबादत कर ही नहीं सकते। इसी इश्क में इबादत पर पढ़ें चंद मशहूर शेर..आइए पढ़ते हैं इबादत पर चंद मशहूर शेर:
Ibadat Shayari in Urdu, Hindi
Ibadat Shayari in Urdu | Ishq Ibadat Shayari | Ibadat Shayari Hindi Me
1. तिरे लिए तो झुकाना भी सर इबादत है
अगर झुका न सके दिल तो बंदगी क्या है
- असग़र वेलोरी
2. न मय-कशी न इबादत हमारी आदत है
कि सामने कोई काम आ गया तो कर लेना
-नातिक़ गुलावठी
3. कोई ख़ुदा हो कि पत्थर जिसे भी हम चाहें
तमाम उम्र उसी की इबादतें करनी
-अहमद फ़राज़
4. मोहब्बत मेरी क्या इबादत नहीं है
वो इक नूर है जिसकी सूरत नहीं है
- आलोक यादव
5. जन्नत के लिए शैख़ जो करता है इबादत
की ग़ौर जो ख़ातिर में तो मज़दूर की सूझी
- नज़ीर अकबराबादी
6. मोहब्बत और इबादत में फ़र्क़ तो है नाँ
सो छीन ली है तिरी दोस्ती मोहब्बत ने
-इफ़्तिख़ार मुग़ल
7. दुनिया कहे कुछ है मगर ईमान की ये बात
होने की तरह हो तो इबादत है मोहब्बत
-मंज़र लखनवी
8. उसे पाक नज़रों से चूमना भी इबादतों में शुमार है
कोई फूल लाख क़रीब हो कभी मैं ने उस को छुआ नहीं
-बशीर बद्र
9. तू गया नमाज़ों में मैं गया जवाज़ों में
वो तेरी इबादत थी ये मेरी इबादत है
- नाज़िम नक़वी
10. मोहब्बत है 'रसा' मेरी इबादत
ये मेरा दिल मेरा दस्त-ए-दुआ है
-रसा चुग़ताई
11. तेरी पहचान के लाखों अंदाज़
सर झुकाना ही इबादत तो नहीं
- परवीन फ़ना सय्यद
12. नमाज़ इक भी हरगिज़ न उस ने क़ज़ा की
शब ओ रोज़ करता इबादत ख़ुदा की
-राजा मेहदी अली ख़ाँ
13. आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता
-दाग़ देहलवी
14. आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए
-बहज़ाद लखनवी
15. ऐ ख़ुदा मेरी रगों में दौड़ जा
शाख़-ए-दिल पर इक हरी पत्ती निकाल
- फ़रहत एहसास
16. यही है इबादत यही दीन ओ ईमां
कि काम आए दुनिया में इंसां के इंसां
- अल्ताफ़ हुसैन हाली
17. क़ुबूल इस बारगह में इल्तिजा कोई नहीं होती
इलाही या मुझी को इल्तिजा करना नहीं आता
- चराग़ हसन हसरत
उम्मीद करते हैं इबादत पर लिखे ये शेर आपको जरूर पसंद आए होंगे। आप इन शायरियों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर भी कर सकते हैं।
