Mango Tips:गर्मी का मौसम आते ही बाजार में आम दिखाई देने लगते हैं। इसके साथ ही जैसे-जैसे मीठे और रसीले आमों की मांग बढ़ती है। व्यापारी पूर्ति के लिए आम को जल्द से जल्द पकाने के लिए तरह-तरह के केमिकल और इंजेक्शन का प्रयोग करते हैं। जिससे आम जल्दी पक सके और बाजार में आपूर्ति प्रभावित ना हो। यदि आप भी आम खाने का शौक रखते हैं तो आज हम आपको साधारण से उपायों के बारे में बताने जा रहे है। जिन्हें फॉलो करके आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आप जो आम खरीद रहे हैं वे नेचुरली पके हुए हैं या कृत्रिम रूप से पके हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ साधारण से सुझावों के बारे में।
How to know mango is ripened naturally
आम पकाने में किस केमिकल का होता है उपयोग
आमतौर पर आम को पकाने के लिए सबसे ज्यादा कैल्शियम कार्बाइड़ नामक रसायन का उपयोग किया जाता है। जो हवा के संपर्क में आने पर एसिटिलीन नाम की गैस छोड़ता है। जिससे आम बहुत तेजी से पक जाता है। वहीं कुछ लोग एथिलीन गैस का उपयोग भी फलों को पकाने के लिए करते हैं। जो कि फलों के पकने की प्रक्रिया को तेज कर देता है।
कैसे करें केमिकल से पके हुए आमों की पहचान
- यदि आम को केमिकल से पकाया गया है तो आम पर हरे और पीले रंग के पैच अलग-अलग देखने को मिलते हैं। वहीं प्राकृतिक रूप से पके हुए आमों पर हरा और पीला रंग एक ही साथ देखने को मिलता है।
- केमिकल से पके हुए आम नेचुरल पके आम से खाने में ज्यादा रसीले होते हैं। इस बात का पता आप आम को देखकर भी कर सकते हैं।
- इसके साथ ही केमिकल से पके आम को खाने पर आपको पेट में जलन, चुभन गले में दर्द और दस्त जैसी समस्या हो सकती है। जबकि प्राकृतिक रूप से पके आमों को खाने से आपको ऐसे किसी भी साइड़ इफेक्ट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- आप पानी में डालकर भी आम की पहचान कर सकते हैं इसके लिए आपको आमों को पानी से भरी बाल्टी में डालना होगा। यदि आम केमिकल से पके हुए हैं तो ये पानी के ऊपर तैरने लगेंगे जबकि पेड़ पर पके आम पानी में डूब जाते हैं।
क्यों हानिकारक हैं केमिकल से पके हुए फल
केमिकल से पके फलों को ज्यादातर कैल्शियम कार्बाइड से पकाया जाता है। जिसे एक मसाले के तौर पर जाना जाता था। लेकिन अब एफएसएसएआई द्वारा कैल्शियम कार्बाइड को प्रतिबंधित कर दिया गया है। क्योंकि इस केमिकल के सेवन करने से तमाम तरह की हेल्थ प्रॉब्लम जैसे सिर दर्द, चक्कर आना और आंखों से कम दिखना जैसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं। इसके अलावा इन केमिकल्स के लगातार प्रयोग से पाचन संबंधी विकार भी सामने आते हैं।
