History Of Harmonium In Hindi: हारमोनियम, यानी भारतीय शास्त्रीय संगीत की जान। हारमोनियम के बिना कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरा नहीं लगता और ना ही किसी म्यूजिकल कॉम्पिटिशन में जान आती है। हारमोनियम की एक आवाज लोगों के मन को शांत कर देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हारमोनियम शब्द हिंदी तो नहीं है फिर ये शब्द आया कहां से? क्या आपको ये पता है कि हारमोनियम को 30 साल के लिए भारत में बैन कर दिया गया था। इतना ही नहीं, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर भी इसके खिलाफ थे। हारमोनियम का इतिहास जितना पुराना है, उससे भी खूबसूरत है उसकी कहानी। आइये इसके बारे में डिटेल में जानते हैं।
कहां हुआ था हारमोनियम का आविष्कार?
1700 के दशक में हारमोनियम का आविष्कार यूरोप में हुआ था। लेकिन इसमें कई सारे बदलाव होते रहे। फाइनली, सन 1840 में हारमोनियम को फ्रांस में बनाया गया और 1842 में एलेक्जेंडर डेबेन ने इसके डिजाइन का पेटेंट करवा लिया और इसे हारमोनियम नाम दिया। जिसके बाद 19वीं शताब्दी में ये भारत आया।
नेहरू और टैगोर क्यों थे हारमोनियम के खिलाफ?
हारमोनियम भारत तो आया लेकिन 1900 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभर में इसे लेकर बहस छिड़ गई। एक विदेशी संगीत वाद्य यंत्र होने की वजह से पंडित जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर भी इसके खिलाफ थे। इतना ही नहीं, ये आंदोलन के निशाने पर भी आ गया था। रवींद्रनाथ टैगोर ने तो हारमोनियम को अपने आश्रम में पूरी तरह बैन भी कर दिया था। तब भारतीय लोगों का मानना था कि हारमोनियम भारतीय संगीत की शुद्धता को नुकसान पहुंचा रहा है और हमारे पारंपरिक यंत्र जैसे सितार और सारंगी के लिए खतरा बन रहा है।
भारत में क्यों 30 साल तक बैन रहा हारमोनियम?
हारमोनियम को लेकर देशभर में इस कदर विवाद छिड़ा कि ऑल इंडिया रेडियो ने वेस्टर्न म्यूजिक विंग के प्रमुख जॉन फोल्ड्स को पत्र लिखकर बताया कि हारमोनियम में माइक्रोटोन पर मौन है, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत की खास विशेषता है। इसके बाद जब रवींद्रनाथ टैगोर ने भी आकाशवाणी कोलकाता को पत्र लिखकर इसे बंद करने की मांग तो 1 मार्च, 1940 को आकाशवाणी ने हारमोनियम पर बैन लगा दिया। ये बैन 30 साल तक रहा और 1970 में हटाया गया।
क्या है हारमोनियम का हिंदी नाम?
क्या आपको हारमोनियम का हिंदी नाम पता है? अगर नहीं तो बता दें कि यूं तो हिंदी में हारमोनियम को खरज कहते हैं। लेकिन कई सारे लोग इसे पेटी बाजा भी कहते हैं। जब नेहरू और टैगोर इसके खिलाफ थे तब इसे सुरदर्पण और सुरमनोहर नाम भी दिया गया, लेकिन जब इन नामों का भी कोई असर नहीं हुआ तो ये हिंदी नाम भी बंद हो गए। आज के समय में हर कोई इसे हारमोनियम के नाम से ही जानता है।
