Women's Day Special: जेल भी गईं और जिल्लत भी सही, पर नहीं मानीं हार, ये हैं पति से अलग होने वाली पहली भारतीय महिला

Rukhmabai Raut: रखमाबाई के इस कदम ने पूरे देशभर में जमकर तूल पकड़ा। लोग उनकी आलोचना करने लगे। चरित्र पर भी सवाल उठाए गए। लोगों ने कहा कि ये कैसी महिला है जो अपने पति के साथ रहने से मना कर रही है। मामला यहां तक भड़का कि देश की आजादी के जननायक बाल गंगाधर तिलक ने भी रखमाबाई की आलोचना कर दी।

Rukhmabai Raut: आज इंटरनेट और डेटिंग ऐप्स की दुनिया में शादी औऱ रिश्तों ने नई शक्ल ले ली है, लव-कम-अरेंज्ड मैरिज होने लगी हैं, लिव-इन रिलेशनशिप बढ़ी है, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर देखने को मिल रहे हैं, समाज में वन नाइट स्टैंड तक हो रहे हैं और साथ ही रिश्तों में घरेलू हिंसा और झूठ भी बढ़े हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात है कि ऐसे वक्त में भी तलाक को शर्मनाक माना जा रहा है। चूंकि तलाक को शर्मनाक समझा जाता है, तलाकशुदा इंसान दुनिया का सबसे बुरा इंसान माना जाता है। समाज ही नहीं घरवालों की नजरों में भी तलाकशुदा महिलाएं विलेन बन जाती है। हालांकि महिलाएं अब ऐसी दकियानूसी सोच के चंगुल से आजाद हो रही हैं। धीरे-धीरे ही सही , वो तलाक को लेकर समाज और लोगों की सोच को बदलने में कामयाब हो रही हैं।

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Rukhmabai Raut: First Indian Women who get divorced with her Husband

आज जितनी तेजी से लोग एक दूसरे के इश्क में गिरफ्तार हो रहे हैं उतनी ही तेजी से डिवोर्स भी हो रहे हैं। महिलाए आर्थिक तौर पर काफी सशक्त और आत्मनिर्भर हो रही हैं। अब वह शादीशुदा जिंदगी में शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने से कतराती नहीं हैं। अगर तलाक लेना पड़े तब भी वह पीछे नहीं हटतीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सबसे पहले किसने तलाक लिया था। वो कौन सी महिला थी जिसने भारत जैसे देश में करीब ढाई सौ साल पहले पति से तलाक लेकर समाज की सोच पर करारा प्रहार किया साथ ही महिलाओं को अपने हक की आवाज बुलंद करने के हौसले से भी नवाज़ा। अगर आपको ना पता हो तो हम बता दें कि तलाक लेने वाली पहली भारतीय महिला का नाम था रखमाबाई राउत।

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