'देर से चांद निकलना भी गलत लगता है..', आज की शायरी में छिपा है मोहब्बत का अलग रंग

Der se Chand Nikalna Bhi Galat lagta hai: यह शेर प्रेम की मासूम मगर खतरनाक सच्चाई को उजागर करता है। शायर जानता है कि यह रास्ता तकलीफों से भरा है, फिर भी वह उससे बच नहीं पाता। महबूब-परस्ती का यही अजाब है कि जहां इंसान खुद समझदार होते हुए भी भावनाओं के आगे हार मान लेता है।

Shayari of The Day (आज की शायरी): अहमद कमाल परवाजी उर्दू के बेहद शानदार शायरों में शुमार हैं। उनकी शायरी में मोहब्बत और जुनून की एक अलग ही बानगी नजर आती है। उन्होंने तमाम ऐसे शेर लिखे हैं जो आज भी खूब सुने और सुनाए जाते हैं। उनका एक ऐसा ही मशहूर शेर है जो प्रेम की उस गहरी और पीड़ादायक अवस्था को बयान करता है, जहां इंसान अपने महबूब में इस कदर डूब जाता है कि दुनिया की हर चीज उसी के पैमाने से नापी जाने लगती है। ये शेर कुछ यूं है:

Moon Shayari

आज की शायरी: देर से चांद निकलना भी गलत लगता है (Photo: iStock)

मुझ को मालूम है महबूब-परस्ती का अज़ाब

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