Chinmaya Amrit Mahotsav: स्वामी चिन्मयानंद कैसे बना वह बागी पत्रकार, 75 साल पहले रखी थी चिन्मय मिशन की नींव

8 मई 1916 को केरल के एर्नाकुलम में जन्मे बालकृष्ण मेनन बचपन से ही काफी मेधावी, ऊर्जावान और तार्किक स्वभाव के थे। अंग्रेजी साहित्य में डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक बेहतरीन लेखक और पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाई।

राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। 23 से 25 अक्तूबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में शुक्रवार को खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। उन्होंने कार्यक्रम में स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बात की। इस अमृत महोत्सव में देश-विदेश से करीब 10 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है।

Chinmay Mission

चिन्मय अमृत महोत्सव के दौरान पीएम मोदी ने चिन्मयानंद के होलोग्राम से बात की (Photo: PIB)

चिन्मय अमृत महोत्सव के इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन पर जब देश-दुनिया की नजरें टिकी हैं, तो अनायास ही उस प्रेरणास्त्रोत की याद आ जाती है, जिनके विजन से इस विशाल यात्रा की नींव पड़ी थी। सोचिए, एक ऐसा संगठन जो आज दुनिया भर में ज्ञान और सेवा का पर्याय बन चुका है, 1952 में उसकी शुरुआत एक ऐसे शख्स ने की थी जो कभी धर्म और अध्यात्म को महज छलावा या संदेह की नजरों से देखता था।

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