अतीत की गलती नहीं छोड़ रही पीछा? पछतावे के दलदल से निकाल देंगी ये किताबें

मनोविज्ञान का कहना है कि पछतावा एक सामान्य मानवीय भावना है। फर्क सिर्फ इतना पड़ता है कि हम उसे बोझ बनाते हैं या सीख में बदल देते हैं।

हम सभी कभी न कभी अपने पुराने फैसलों को याद करके सोचते हैं कि काश तब ऐसा किया होता, काश वह मौका नहीं छोड़ा होता। वैसे मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि पछतावे से बाहर निकलने का सबसे अच्छा तरीका अतीत में फंसना नहीं, उससे सीख लेना है। कुछ किताबें इसी नजरिए को मजबूत करती हैं और जीवन को नए ढंग से देखने की प्रेरणा देती हैं। यहां ऐसी ही पांच किताबों के बारे में जानिए, जो पछतावे से आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं।

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पछतावे में जीना छोड़िए, ये 5 किताबें सिखाएंगी आगे बढ़ना (Photo: iStock)

1. द मिडनाइट लाइब्रेरी

यह उपन्यास नोरा सीड नाम की महिला की कहानी है, जिसे जीवन के अलग-अलग विकल्पों को जीने का मौका मिलता है। वह देखती है कि जिन फैसलों पर उसे सबसे ज्यादा पछतावा था, वे हर दुनिया में खुशी की गारंटी नहीं बनते। किताब यह संदेश देती है कि हर चुनाव के साथ कुछ पाने और कुछ छोड़ने की कहानी जुड़ी होती है।

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