आज बसंत पंचमी है।देशभर में बसंत पंचमी की धूम है। यह त्योहर सनातन धर्म में खास महत्व रखता है।बसंत पंचमी के इस खास दिन मां सरस्वती की पूजा की जा रही है। लोग माता की भक्ति में डूबे नजर आ रहे हैं। देवी मंदिरों में बेहद भीड़ नजर आ रही है। हर कोई बसंत पंचमी के रंग में नजर आ रहा है। बसंत पंचमी की आमद के साथ ही सर्दियों की विदाई मानी जाती है।
Basant Panchami Poems in Hindi (बसंत पंचमी की कविताएं)
1. देखो-देखो बसंत ऋतु है आयी
अपने साथ खेतों में हरियाली लायी
किसानों के मन में हैं खुशियाँ छाई
घर-घर में हैं हरियाली छाई
हरियाली बसंत ऋतु में आती है
गर्मी में हरियाली चली जाती है
हरे रंग का उजाला हमें दे जाती है
यही चक्र चलता रहता है
नहीं किसी को नुकसान होता है
देखो बसंत ऋतु है आयी।
Basant Panchami Poems
2. टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात
कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरुणिम की रेख देख पाता हूं
गीत नया गाता हूं
- अटल बिहारी वाजपेयी
3. धरा पे छाई है हरियाली
खिल गई हर इक डाली डाली
नव पल्लव नव कोपल फुटती
मानो कुदरत भी है हँस दी
छाई हरियाली उपवन मे
और छाई मस्ती भी पवन मे
उडते पक्षी नीलगगन मे
नई उमन्ग छाई हर मन मे
लाल गुलाबी पीले फूल
खिले शीतल नदिया के कूल
हँस दी है नन्ही सी कलियाँ
भर गई है बच्चो से गलियाँदेखो नभ मे उडते पतन्ग
भरते नीलगगन मे रंग
देखो यह बसन्त मसतानी
आ गई है ऋतुओ की रानी।
Basant Ritu par Kavita
4. रग-रग में इतना रंग भरा,
कि रंगीन चुनरिया झूठी है !
क्या होड़ करें चन्दा तेरी,
काली सूरत धब्बे वाली !
कहने को जग को भला-बुरा,
तू हँसती और लजाती !
मौसम सच्चा तू सच्ची है,
यह सकल बदरिया झूठी है!
- गोपाल सिंह नेपाली
Poem on Basant Panchami
7. कलिका के चुम्बन की पुलकन
मुखरित जब अलि के गुंजन में
तब उमड़ पड़ा उन्माद प्रबल
मेरे इन बेसुध गानों में;
ले नई साध ले नया रंग
मेरे आंगन आया बसंत
- भगवतीचरण वर्मा
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