आजकल की बिजी लाइफस्टाइल की वजह से पेरेंट्स के पास बच्चों के लिए बहुत ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में पेरेंट्स बच्चों का ध्यान भटकाने के लिए अक्सर उन्हें बाजार में मिलने वाले अलग अलग तरह के खिलौने दे देते हैं। इन दिनों बाजार में लाइट एंड साउंड वाले कई खिलौने मौजूद हैं, जो बच्चों को आकर्षित करते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि बच्चों को लाइट एंड साउंड वाले खिलौने नहीं देना चाहिए। ये बच्चों के दिमाग पर बहुत बुरा असर डालते हैं। चलिए जानते हैं क्यों बच्चों को लाइट एंड साउंड वाले खिलौने नहीं देना चाहिए।
बहुत ज्यादा उत्तेजना
लाइट और तेज आवाज वाले खिलौने बच्चों को अत्यधिक उत्तेजित कर सकते हैं। लगातार तेज रोशनी और शोर उनके अंगों को ओवरलोड कर सकते हैं, जिससे वे चिड़चिड़े हो सकते हैं या सोने में दिक्कत महसूस कर सकते हैं।
कल्पनाशक्ति में कमी
लाइज एंड साउंड वाले खिलौने में पहले से ही सबकुछ तय होता है। बटन दबाते ही आवाज और रोशनी आने लगती है। ऐसे में बच्चा इन्हें बस देखता और सुनता है। जिस वजह से उसकी कल्पनाशक्ति कम हो जाती है।
खेल से दूरी
लाइट एंड साउंड वाले खिलौने का इस्तेमाल करने से बच्चों में खेल से दूरी बन जाती है। लकड़ी के ब्लॉक, कपड़े की गुड़िया या खाली डिब्बे इस तरह के खिलौने बच्चों के दिमाग को शार्प बनाते हैं।
कम फोकस
लगातार बदलते रंग और तेज आवाजें बच्चों के ध्यान केंद्रित करने (concentration) की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। उन्हें किसी एक चीज पर लंबे समय तक ध्यान देना मुश्किल हो सकता है।
भाषा सिखने में कमी
कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ज्यादा आवाज वाले इलेक्ट्रॉनिक खिलौने बच्चों को भाषा सिखने में बाधा डाल सकते हैं। जब खिलौने से लगातार आवाज आती रहती है, तो बच्चों की माता-पिता से बातचीत कम हो जाती है, जो भाषा सीखने के लिए महत्वपूर्ण है।
