कैसे होती है न्यायिक जांच? कब दिये जाते हैं इसके आदेश; जानिए पुलिस जांच से कितनी होती है अलग

Judicial Inquiry: उत्तर प्रदेश के हाथरस में 'भोले बाबा' के सत्संग में भगदड़ मचने से 121 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे को लेकर न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। दरअसल, यह हादसा था या कोई साजिश? तमाम पहलुओं की जांच होगी, लेकिन क्या आपको पता है कि न्यायिक जांच आखिर कैसे होती है?

KEY HIGHLIGHTS
  • योगी सरकार ने 3 सदस्यीय न्यायिक आयोग का किया गठन
  • हाई कोर्ट के रिटायर न्यायाधीश की अध्यक्षता में होगी जांच
  • न्यायिक जांच पर जनता को सबसे ज्यादा होता है भरोसा

Judicial Inquiry: उत्तर प्रदेश के हाथरस में 'भोले बाबा' का सत्संग मौत के सत्संग में तब्दील हो गया। इस सत्संग के दौरान भगदड़ मचने से 121 जिंदगियां काल के गर्त में समा गईं। जिनमें सबसे ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। हाथरस में चारों ओर चीख-पुकार और लाचारी दिखाई दे रही थी। प्रदेश की योगी सरकार ने सत्संग के बाद हुई भगदड़ की घटना में साजिश की आशंका जताते हुए न्यायिक जांच कराने की बात कही है।

Judicial Inquiry

न्यायिक जांच कैसे होती है?

न्यायिक जांच आयोग का हुआ गठन

बता दें कि राज्यपाल आनंदी पटेल के निर्देश पर योगी सरकार ने भगदड़ की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्ति) ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव करेंगे। ऐसे में चलिए समझते हैं कि न्यायिक जांच आखिर होती कैसे है? और यह पुलिस जांच से कितनी अलग है।

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