'ये दिल मांगे मोर', 'ना छोड़ना', आज भी प्रेरित करते हैं कारगिल युद्ध के नायकों के ये शब्द, चोटियों पर दमकता है इनका शौर्य

पाकिस्तान के इस धोखे और पीठ पीछे वार का भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया। शून्य से नीचे तापमान और रीढ़ कंपा देने वाली सर्दी में भारतीय जवानों ने कारगिल की चोटियों पर अपने शौर्य एवं पराक्रम का लोहा दुनिया को मनवाया। कारगिल की चोटियां आज भी इनके बहादुरी के किस्से सुनाती हैं। तोलोलिंग हो या खालूबर, हर चोटी पर भारतीय सेना के अधिकारियों एवं जवानों के जांबाजी मिलेंगे।

Kargil Vijay Diwas 2025 : करगिल युद्ध के आज 26 साल पूरे हो चुके हैं। 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच करीब दो महीने तक चले युद्ध में जीत भारत की हुई। यह युद्ध 16,500 फीट (5,000 मीटर) की ऊंचाई पर अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लड़ा गया था। इस युद्ध में भारत के 527 सैनिकों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, तो वहीं पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ का दावा है कि इस युद्ध में उनके करीब चार हजार सैनिक मारे गए। कारगिल युद्ध में असाधारण वीरता दिखाने के लिए चार लोगों को बहादुरी के सबसे बड़े सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

Kargil Vijay Diwas 2025

साल 1999 में करीब दो महीने तक चला कारगिल युद्ध। तस्वीर-PTI

कारगिल की चोटियां आज भी सुनाती हैं इनकी बहादुरी के किस्से

पाकिस्तान के इस धोखे और पीठ पीछे वार का भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया। शून्य से नीचे तापमान और रीढ़ कंपा देने वाली सर्दी में भारतीय जवानों ने कारगिल की चोटियों पर अपने शौर्य एवं पराक्रम का लोहा दुनिया को मनवाया। कारगिल की चोटियां आज भी इनके बहादुरी के किस्से सुनाती हैं। तोलोलिंग हो या खालूबर, हर चोटी पर भारतीय सेना के अधिकारियों एवं जवानों के जांबाजी मिलेंगे।

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