Nirmala Sitharaman On Women's Reservation Act: महिला आरक्षण कानून देश में कब लागू किया जाएगा? इस सवाल का जवाब खुद मोदी सरकार की महिला मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया है। उन्होंने बताया है कि महिला आरक्षण कानून 2024 की जनगणना के बाद लागू किया जाएगा।
2024 की जनगणना के बाद लागू किया जाएगा महिला आरक्षण कानून।
2024 की जनगणना के बाद लागू होगा महिला आरक्षण कानून
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र 2024 की जनगणना के बाद महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए कदम उठाएगा। दक्षिण कन्नड़ जिले के मूडबिदरी में शुक्रवार को रानी अब्बक्का के नाम पर स्मारक डाक टिकट जारी करने के बाद सीतारमण ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक हकीकत बन गया है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर हमेशा यकीन जताया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई से कर दिया था इनकार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इससे पहले शुक्रवार को एक अधिवक्ता की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल और समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता का इस मामले में कोई 'व्यक्तिगत हित' नहीं है, उन्होंने इसमें जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने के लिए कहा।
याचिकाकर्ता की ओर से दिया गया था ये तर्क
न्यायमूर्ति ने कहा, 'इसमें क्या आपका कोई व्यक्तिगत हित है? यह स्पष्ट रूप से जनहित से जुड़ा है।' याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वह 'संपूर्ण नारीत्व' का प्रतिनिधित्व करती है। न्यायमूर्ति प्रसाद ने याचिकाकर्ता को लागू नियमों के अनुसार जनहित याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति दी।
सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित है मामला
केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि कानून को लागू करने का मामला पहले से ही उच्चतम न्यायालय में लंबित है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाने जाने वाले इस कानून में महिलाओं के लिए लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें आरक्षित करने की परिकल्पना की गई है। वहीं राष्ट्रपति की 29 सितंबर को मिली मंजूरी के बाद इसने कानून का रूप ले लिया था। यह कानून तुरंत लागू नहीं होकर बल्कि एक नई जनगणना आयोजित होने के बाद लागू होगा जिसके आधार पर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के लिए परिसीमन किया जाएगा।
गुमनाम सेनानियों के योगदान को मिल रही पहचान
पुर्तगाली शासन के खिलाफ लड़ने वाली उल्लाल की 16वीं सदी की रानी अब्बक्का के साहस और वीरता की सराहना करते हुए सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार ने शाही ताकतों के खिलाफ लड़ने वाले गुमनाम सेनानियों के योगदान को पहचान देने के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तौर पर सरकार ने 14,500 कहानियों का एक डिजिटल जिला कोष बनाया है जिसमें स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़े स्थानों का जिक्र है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जतायी कि तटीय कर्नाटक में रानी अब्बक्का के नाम पर एक सैनिक स्कूल खोला जाएगा। उन्होंने स्मारक डाक टिकट के वास्ते इस्तेमाल किए गए रानी अब्बक्का के चित्र के लिए कलाकार वासुदेव कामत को बधाई दी।
(इनपुट- भाषा)
