Who Will Be Mumbai Mayor: BMC चुनाव में महायुति द्वारा जीत हासिल करने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि मुंबई का मेयर कौन बनेगा। बीजेपी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। उधर, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे भाजपा से डरे हुए हैं, क्योंकि उपमुख्यमंत्री ने शनिवार को मुंबई में नवनिर्वाचित शिवसेना पार्षदों को एक पंचसितारा होटल में ठहराया। महायुति के हाथों बीएमसी का नियंत्रण खोने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उद्धव ने संकेत दिया कि बीएमसी पर नियंत्रण के लिए चल रही खींचतान के बीच शिंदे शिवसेना गुट में फूट पड़ सकती है।
मुंबई मेयर पर फंसेगा पेंच?
उद्धव का दावा, डरे हुए हैं शिंदे
उद्धव ने कहा, एकनाथ शिंदे भाजपा से डरे हुए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने पार्षदों को एक फाइव स्टार होटल में रखा है। उन्हें पता है कि अगर एक बार फूट पड़ चुकी है, तो दोबारा भी पड़ सकती है। उन्होंने 2022 की उस कुख्यात घटना का जिक्र किया, जब 40 विधायकों के विद्रोह के बाद शिवसेना में फूट पड़ गई थी। शिंदे के नेतृत्व में हुए इस विद्रोह के कारण उद्धव-कांग्रेस-एनसीपी सरकार गिर गई थी। इसके बाद उन्होंने भाजपा के साथ हाथ मिलाकर मुख्यमंत्री पद संभाला था।
बता दें कि खबरें उड़ रही हैं कि शिंदे ने अपने सभी 29 शिवसेना पार्षदों को ताज लैंड्स एंड होटल पहुंचने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त या दलबदल की कोशिश को रोका जा सके।
बीजेपी-शिवसेना ने 29 में से 25 निकायों में जीत दर्ज की
शुक्रवार को महाराष्ट्र में भाजपा-शिव सेना गठबंधन ने नगर निगम चुनावों में शानदार जीत हासिल की और 29 में से 25 निकायों में जीत दर्ज की। बीएमसी चुनावों में भाजपा की जीत सोने पर सुहागा साबित हुई, जहां भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, भाजपा को बहुमत के आंकड़े (114) को पार करने के लिए शिंदे सेना की जरूरत है। महायुति की इस जीत ने बीएमसी पर ठाकरे परिवार के लगभग तीन दशक के वर्चस्व को समाप्त कर दिया।
हालांकि, 20 वर्षों के अलगाव के बाद फिर से एक साथ आए उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी हारी नहीं। उद्धव सेना-एमएनएस गठबंधन ने 71 सीटें (65-6) जीतकर मुंबई के मराठी भाषी क्षेत्र के कई वार्डों पर अपना कब्जा बरकरार रखा। पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि संख्या बल कम होने के बावजूद उनकी पार्टी मुंबई में अपने महापौर को निर्वाचित होते देखना चाहती है। उद्धव ने कहा, हमारी यही इच्छा है कि मुंबई में हमारे महापौर निर्वाचित हों। आज भी हमारी यही इच्छा है, लेकिन फिलहाल हमारे पास बहुमत नहीं है।
'लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई'
अपनी पार्टी द्वारा जीती गई 65 सीटों का हवाला देते हुए उद्धव ने जोर देकर कहा कि मुंबई में उनका गुट अभी भी राजनीतिक रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा, वे कागजों पर शिवसेना को खत्म कर सकते हैं, लेकिन जमीन से नहीं। भाजपा सिर्फ कागजों पर है; जमीन पर उसका कोई अस्तित्व नहीं है।
उन्होंने महायुति पर राज्य मशीनरी का दुरुपयोग करने और दलबदलुओं को अपने पाले में करने के लिए सत्ता, धन और धमकियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्यकर्ताओं की निष्ठा अटूट बनी हुई है।
उद्धव ने आगे कहा, मेरी और राज की संयुक्त रैलियों में भारी भीड़ देखी गई, लेकिन महायुति की रैलियों में सिर्फ खाली कुर्सियां थीं। मुझे आश्चर्य है कि क्या कुर्सियों ने उनके लिए वोट दिया है, क्योंकि उन्हें वोट मिले हैं, और हमारी भीड़ हमारे लिए वोटों में तब्दील नहीं हुई। अपनी बात समाप्त करते हुए उद्धव ने ऐलान किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
