उत्तराखंड के देहरादून में दून यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ने इमोशनल भाषण दिया। उन्होंने मातृभूमि, मातृभाषा और मां की महत्ता को बताया। साथ ही उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें, भले ही वे आगे के जीवन में किसी भी पद पर हों। उन्होंने अपने स्पीच कहा कि मैं आज खुश हूं, जब मैं छोटी हमको मातृभूमि, मातृभाषा और मां के बारे में पढ़ाया जाता है। इसलिए सदा सर्वदा मातृभूमि, मातृभाषा, मां का बड़ा महत्व है। जिसके पास ममता नहीं, उसको हम ज्ञानी कहेंगे तो अज्ञानी किसको कहेंगे।
दून यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि इसलिए आज मैं खुश हूं आपने किताबी भाषा के साथ-साथ यहां के लोकल भाषा को भी यहां सिखाया जाता है। कहा जाता है मां जैसी भी हो, दूसरे की दृष्टि में मां गरीब हो, देखने में जैसी भी हो मां, मां होती है। मातृभाषा लोगों के नजरों में कैसी भी हो मातृभाषा अपनी होती है। दुनिया की जितनी भी भाषा है। सीखने में कोई भी बाधा नहीं है। लेकिन अपनी भाषा, अपने घरों में, अपने समाज में यूज करना, हम लोगों का कर्तव्य होता है। नहीं हम लोगों की पहचान खो जाएगी। इसलिए मातृभाषा में बोलना और मातृभूमि को श्रद्धा करना, मातृभूमि के लिए जिंदगी तक देना, मातृभाषा और मां को प्यार करना हमलोगों का कर्तव्य है। इसी से हमलोगों की पहचान और अस्मिता रहती है।
#WATCH | Uttarakhand: President Droupadi Murmu concluded her speech at Doon University, Dehradun with a brief extem… t.co/yhKvoMEFp7
— ANI (@ANI) Dec 9, 2022
पढ़ाई जितनी भी की हो, आप जो भी बन जाओ, आप कल ऑफिसर बनेंगे। इंजीनिर बनेंगे। डॉक्टर बनेंगे। आईएएस, आईपीएस बनेंगे। लेकिन आप को अपनी जमीन कभी नहीं भूलनी चाहिए। विदेशों ने हम लोगों पर इतने दिनों तक शासन किया। लेकिन आज भी भारत जैसे भी हो, जो भी हो। आज भारत को सभी देख रहे हैं, क्यों? भारत के लोगों का भारत के प्रति, अपनी मातृभूमि के प्रति, भारत में विभिन्नता में जो एकता है। वसुधैवकुटुंबकम की जो भावना है। यही हमलोगों को बांधकर रखती है। यही मैं आप सबसे आशा करूंगी कि आप आगे जाकर जो भी बने लेकिन भारतीयता को बनाए रखें।
