Indian Navy: भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने गुरुवार को कहा कि नौसेना को पता है कि चीन पाकिस्तान को पनडुब्बियां दे रहा है। उन्होंने कहा कि नौसेना स्थिति पर नजर रख रही है तथा देश की समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है। नवाचार और स्वदेशीकरण पर आधारित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम ‘स्वावलंबन 2025’ से पहले यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने यह भी माना कि चीन ने अपने तीसरे विमानवाहक पोत ‘फुजियान’ को नौसेना बेड़े में शामिल कर लिया है।
भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन।
हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं- वाइस एडमिरल
विद्युत-चुंबकीय प्रक्षेपण प्रणाली (‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट’) से युक्त इस युद्धपोत को चीन का सबसे आधुनिक पोत बताया जा रहा है। पोत को इस महीने की शुरुआत में एक गोपनीय कार्यक्रम के दौरान सेवा में शामिल किया गया था। उस कार्यक्रम में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी मौजूद थे। चीन द्वारा पाकिस्तान को पनडुब्बियां और दूसरे सैन्य उपकरण देने के बारे में पूछे जाने पर, उप नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘यह सच है और हमें इसकी पूरी जानकारी है। हमें पता है कि वे (चीन) उन्हें (पाकिस्तान को) पनडुब्बियां दे रहे हैं, इनकी तैनाती बहुत जल्द शुरू होगी। हम हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।’
भारतीय शिपयार्ड्स में बनाए जा रहे 52 जहाज
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उन्होंने कहा, 'वर्तमान में भारतीय शिपयार्ड्स में 52 जहाज बनाए जा रहे हैं, और अगले 2–3 वर्षों में नौसेना को सौंप दिए जाएंगे। हमें उम्मीद है कि दिसंबर तक 4 जहाज मिल जाएंगे। हमें 69 जहाजों और 6 पनडुब्बियों के लिए स्वीकृति की आवश्यकता मिल चुकी है, और इनके कॉन्ट्रैक्ट अगले 1–2 वर्षों में पूरे कर लिए जाएंगे। इन सभी के लिए AoN दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का है, जो भारतीय रक्षा उद्योग के लिए, खासकर नौसेना के संदर्भ में, एक बहुत बड़ा अवसर दर्शाता है। हमने अमेरिका के साथ MQ-9 रीपर UAV के लिए एक समझौता किया है, और हमें उम्मीद है कि डिलीवरी अनुबंध के अनुसार ही होगी। भारतीय नौसेना का लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है कि हम अन्य देशों की ओर तभी देखेंगे, जब हमें पता होगा कि भारत में उसका कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है।'
'ऑपरेशन सिंदूर' से हमने बहुत सीखा-वात्स्यायन
वात्सायन ने आगे कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जो हमने देखा और जो सबक मिले, उनमें से कुछ को हमने चुनौतियों में बदला है, लेकिन स्वावलंबन 2025 में आप जो देखेंगे, वे अत्याधुनिक तकनीकी चुनौतियां होंगी जिन्हें सिंदूर से पहले ही पहचान लिया गया था… ये सभी तकनीकें युद्धक क्षमता के क्षेत्र में पहले से मौजूद हैं और समानांतर रूप से नागरिक क्षेत्र में भी विकसित हो रही हैं। हमने इन तकनीकों से उत्पन्न उपयोग-केस के आधार पर अपनी आवश्यकताएँ पहचानी हैं, और इन्हें MSMEs तथा स्टार्टअप्स के लिए चुनौतियों के रूप में प्रस्तावित किया गया है, ताकि वे इन तकनीकों से परिचालन स्तर पर उपयोगी समाधान विकसित कर सके।'
(इनपुट भाषा)
