Putin Visit to India in December: भारत हर दिन के साथ अपनी एयरफोर्स समेत सभी सेनाओं की मजबूती के लिए काम कर रहा है। आज के आधुनिक युद्ध में आसमान पर राज होना बेहद जरूरी है। ऐसे में इंडियन एयरफोर्स अपनी मजबूती के लिए हर कदम उठा रही है। वहीं, नए फाइटर जेट्स को लेकर भी काम में तेजी लाई जा रही है। इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 5-6 दिसंबर को भारत आ रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आ रहे हैं। इस दौरान रक्षा सहयोग, खासकर Su-57 लड़ाकू विमान और S-500 मिसाइल सिस्टम पर चर्चा मुख्य एजेंडा रहने की उम्मीद है।
भारत आ रहे हैं रूसी राष्ट्रपति पुतिन।
Su-57 फाइटर जेट का भारत को ऑफर
चर्चाओं का मुख्य मुद्दा मॉस्को की यह इच्छा होगी कि भारत को Su-57 फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल किया जाए। Su-57 देखा जाए तो अमेरिका के टॉप फाइटर जेट F-35 का तगड़ा जवाब है। यह एक अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ एयरक्राफ्ट है, जिसे आसमान में राज करने के लिए बनाया गया है।
रूसी सरकार के सूत्रों ने टाइम्स नाउ को बताया कि मॉस्को चाहता है कि भारत सिर्फ खरीदार के तौर पर नहीं बल्कि संभावित सह-उत्पादन में भी एक प्रमुख भागीदार बने। चीन और पाकिस्तान से चुनौतियों का सामना कर रहे भारतीय वायु सेना के लिए इस समय अपनी फाइटर स्क्वाड्रन को आधुनिक बनाने की बेहद जरूरत है। ऐसे में अगर डील होती है कि यह इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी होगी। हालांकि, भारत पहले FGFA (पांचवीं पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट) प्रोग्राम से बाहर हो गया था, लेकिन रूस नए और बेहतर शर्तों पर सहयोग को फिर से शुरू करना चाहता है।
S-400 का बाप S-500 की होगी डील?
पुतिन की नई दिल्ली में होने वाली बातचीत में मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर भी मुख्य रूप से चर्चा होगी। पहले से कॉन्ट्रैक्ट किए गए और डिलीवर किए गए गेम-चेंजर S-400 ट्रायम्फ की अंतिम डिलीवरी पर शिखर सम्मेलन के दौरान चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान से हुए संघर्ष में भारत ने S-400 से दुश्मन देश के सारे मंसूबे फेल कर दिए थे। ऐसे में S-500 की डील होने से भारत की शक्ति और बढ़ जाएगी।
बताया जा रहा है कि रूस अपनी अगली पीढ़ी के S-500 प्रोमेटी सिस्टम को भारत को पेश करेगा। हाइपरसोनिक हथियारों को रोकने और लंबी दूरी से दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को निशाना बनाने में सक्षम S-500, रूसी वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली का सबसे एडवांस वर्जन है। सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली के रणनीतिक महत्व और दशकों से बने गहरे भरोसे को देखते हुए, मॉस्को S-500 के सह-विकास के लिए भारत को भी भागीदार बनाने पर विचार कर रहा है।
यात्रा का रणनीतिक समय
पुतिन की यह यात्रा दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है। यूक्रेन में चल रहे संघर्ष, मॉस्को पर पश्चिमी देशों के तगड़े प्रतिबंध और रूस के चीन के साथ बढ़ते संबंधों के बीच, पुतिन भारत आ रहे हैं। नई दिल्ली के लिए अमेरिका, फ्रांस और इजराइल के साथ संबंध मजबूत करते हुए रूस के साथ संबंध बनाए रखना एक मुश्किल रणनीतिक कार्य है। पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद, भारत ने रूस से तेल का आयात जारी रखा है, संयुक्त ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है और बड़े पैमाने के रक्षा सौदों को पूरा किया है। दिसंबर में होने वाला शिखर सम्मेलन न केवल सैन्य सहयोग को और मजबूत करेगा बल्कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत-रूस के संबंधों की निरंतरता का भी स्पष्ट संदेश देगा।
सात दशकों की रक्षा विरासत
70 से अधिक वर्षों से मॉस्को नई दिल्ली का सबसे महत्वपूर्ण रक्षा भागीदार रहा है। मिग फाइटर और T-90 टैंक से लेकर ब्रह्मोस मिसाइल और S-400 शील्ड तक, रूसी के हथियार भारत के पास लगभग 50 प्रतिशत तक हैं। हाल के वर्षों में पश्चिमी रक्षा कंपनियों ने भारत में तेजी से अपनी जगह बनाई है, लेकिन भारतीय सैन्य मशीनरी की रीढ़ की हड्डी अभी भी रूस ही है।
