US Iran War: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच रूसी तेल टैंकर, (एक्वा टाइटनपाइक्सिस पायनियर) मालवाहक जहाज रविवार (22 मार्च) को भारत के मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचा। यह जहाज मूल रूप से चीन जा रहा था और दक्षिण चीन सागर में यात्रा कर रहा था, तभी इस सप्ताह की शुरुआत में इसने भारत की ओर यू-टर्न लिया।
रूसी तेल टैंकर, (एक्वा टाइटनपाइक्सिस पायनियर) मालवाहक जहाज की फाइल फोटो।
अमेरिका से एलपीजी जहाज पहुंचा भारत
इससे पहले आज सुबह अमेरिका के टेक्सास से एलपीजी ले जा रहा मालवाहक जहाज पाइक्सिस पायनियर भी न्यू मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचा।गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से तेल और गैस का आयात देश के लिए महत्वपूर्ण है। युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कॉमर्शियल जहाजों की आवाजाही ठप्प हो चुकी है। हालांकि, भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है, जिससे देश को कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर कुछ दबाव कम हुआ है।
यूएई से कच्चा तेल लेकर भारत पहुंचा जग लाडकी जहाज
बता दें कि इस सप्ताह की शुरुआत में भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर जग लाडकी, टर्मिनल पर हुए हमले के बावजूद, संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह से सुरक्षित रूप से रवाना होकर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया।
संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चे तेल लेकर जग लाडकी, बुधवार मुंद्रा बंदरगाह तक पहुंची। जग लाडकी युद्ध क्षेत्र से अदानी समूह के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचने वाला दूसरा जहाज है। इससे पहले, एलपीजी टैंकर शिवालिक सोमवार को बंदरगाह पर पहुंचा था।
एलपीजी से भरे दो जहाज पहुंचे भारत
कच्चे तेल के अलावा एलपीजी से भरे दो जहाज भी भारत पहुंच चुके हैं। एलपीजी से भरा जहाज शिवालिक सोमवार को मुंद्रा पहुंचा, जबकि दूसरा एलपीजी टैंकर नंदा देवी मंगलवार तड़के गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। दोनों जहाजों में लगभग 92,712 टन एलपीजी थी, जो देश में एक दिन की खाना पकाने की गैस की आवश्यकता के बराबर है। दोनों एलपीजी ले जाने वाले जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया।
भारत के लिए कितना जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता?
भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है। युद्ध शुरू होने से पहले, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आता था। भारत में एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है।
