अगर भारत सरकार कहे तो मणिपुर में सहयोग के लिए तैयार, अमेरिका की पुरानी आदत

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Jul 8, 2023, 09:20 AM IST

Eric Garcetti on Manipur Violence: अमेरिका के बारे में सामान्य धारणा है कि वो दूसरों के आंतरिक मामलों में दखल देने की फिराक में रहता है। भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा कि अगर सरकार चाहे तो मणिपुर मामले में सहयोग के लिए तैयार हैं।

Eric Garcetti on Manipur Violence: दुनिया के कुछ मुल्क है जो किसी भी देश को सलाह देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। एक तरफ वो सार्वभौमिक सत्ता की वकालत करते हैं। लेकिन जमीन पर वो दूसरे देशों के आंतरिक मुद्दों में परोक्ष या प्रत्यक्ष दखल देने की कोशिश करते हैं। मेइती और कूकी मामले में जिस तरह से मणिपुर जला उसके बाद भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी को मौका नजर आया और कोलकाता में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अगर भारत सरकार कहेगी तो मणिपुर में सामान्य हालात बनाने के लिए अमेरिका मदद के लिए तैयार है, हालांकि यह भारत का आंतरिक मामला है।उन्होंने उम्मीद जताई कि मणिपुर में शांति लौटेगी क्योंकि इससे क्षेत्र में अधिक प्रगति और निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।

मणिपुर में हिंसा चिंता का विषय

गार्सेटी ने एक पत्रकार के उस सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की कि क्या पिछले दो महीनों में मणिपुर में हुई हिंसा, जिसमें राज्य के ईसाई अल्पसंख्यकों पर मौतें और हमले शामिल हैं, अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। मैं पहले मणिपुर के बारे में बात करता हूं। वह यह कि हम वहां शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। जब आप पूछते हैं कि क्या यह संयुक्त राज्य अमेरिका से संबंधित है, तो मुझे नहीं लगता कि यह रणनीतिक चिंताओं के बारे में है, मुझे लगता है कि यह मानवीय चिंताओं के बारे में है।जिस प्रकार की हिंसा हम देखते हैं उसमें जब बच्चे या व्यक्ति मरते हैं तो आपको इसकी परवाह करने के लिए भारतीय होने की आवश्यकता नहीं है, और हम जानते हैं कि शांति कई अन्य अच्छी चीजों के लिए मिसाल है। पूर्वोत्तर और पूर्व में बहुत प्रगति हुई है। देश ने हाल के वर्षों में कुछ उल्लेखनीय काम किए हैं और वे शांति के बिना जारी नहीं रह सकते। उन्होंने आगे कहा कि अगर कहा जाए तो हम किसी भी तरह से सहायता करने के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम हैं लेकिन हम जानते हैं कि यह एक भारतीय मामला है। हम उस शांति के लिए प्रार्थना करते हैं, कि वह जल्दी आ सके क्योंकि अगर शांति कायम रहेगी तो हम अधिक सहयोग, अधिक परियोजनाएं, अधिक निवेश ला सकते हैं।

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