Shivsena UBT: तृणमूल कांग्रेस की तरह ही अब शिवसेना (यूबीटी) में नया संकट खड़ा होता दिख रहा है। शिवसेना यूबीटी में बागी सांसदों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसे लेकर यूबीटी कैंप सक्रिय हो गया है। बताया जा रहा है कि आज कुछ बागी सांसद स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं। इस मामले पर यूबीटी कैंप सुबह 10 बजे संजय राउत के आवास पर प्रेस कांफ्रेंस करेगा।
संजय राउत
यूबीटी कैंप ने स्पीकर को पत्र लिखा
यूबीटी कैंप ने स्पीकर को पत्र लिखकर कहा कि हमारा यह दावा कि हम ही असली शिवसेना हैं, अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अब, हमारे कुछ सांसद अलग होना चाहते हैं और संभवतः आपसे संपर्क करके किसी अन्य पार्टी में शामिल होना चाहते हैं। उन्हें इसमें शामिल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि मामला अभी विचाराधीन है।
पत्र में लिखा है, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सदन में अपने विधिवत अधिकृत नेता और सचेतक के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाली एक एकल राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त रहेगी, और पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी गुट या पृथक समूह को कोई अलग मान्यता, दर्जा, विशेषाधिकार या सुविधा प्रदान नहीं की जाएगी; यदि ऐसा कोई अनुरोध प्राप्त होता है, तो शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को आपके कार्यालय के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना उस पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। पार्टी कानून में उपलब्ध अपने सभी अधिकारों को सुरक्षित रखती है, जिसमें दसवीं अनुसूची के प्रावधानों को लागू करने और ऊपर उल्लिखित संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत किसी भी आचरण के संबंध में आवश्यक उपाय करने का अधिकार शामिल है।
दिल्ली पहुंचे बागी सांसद
सूत्रों के मुताबिक, दो सांसद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य चार के बाद में पहुंचने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, यह समूह शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के आवास पर बैठक करेगा, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी आज चर्चा में शामिल होने की संभावना है। एकनाथ शिंदे भी दिल्ली पहुंच रहे हैं।
संजय राउत ने कसा तंज
इस घटनाक्रम को लेकर संजय राउत ने खरीद-फरोख्त की ओर इशारा करते हुए तंज कसा है। उन्होंने एक्स पर लिखा-
अपना सपना, मनी, मनी!
नहीं नहीं – महुआ जी, न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति सांसद 50 करोड़ रुपये तय किया गया है।
15 करोड़ रुपये तो सिर्फ अग्रिम राशि है।
सच कहूं तो, इन लोगों की कीमत 50,000 रुपये भी नहीं है।
इनकी कीमत तो सिर्फ शिवसेना और टीएमसी के ब्रांड टैग की वजह से बढ़ी है।
शिवसेना यूबीटी में दरार
टीएमसी में दरार के बाद शिवसेना यूबीटी को लेकर भी ऐसी अटकलें लगनी शुरू हुईं। इसके बाद रविवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई। इस बैठक में पार्टी के नौ सांसदों में से केवल चार सांसद अरविंद सावंत,अनिल देसाई,राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए। वहीं, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े। एक अन्य सांसद संजय जाधव बैठक में शामिल नहीं हो सके, हालांकि बाद में उन्होंने उद्धव ठाकरे से फोन पर बातचीत की।
संजय देशमुख की मुलाकात ने बढ़ाया सस्पेंस
इन अटकलों को और बल तब मिला जब यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख ने सोमवार को दिल्ली में शिंदे गुट से जुड़े केंद्रीय मंत्री प्रतापराव मानिकराव जाधव से मुलाकात की। हालांकि देशमुख ने दावा किया कि वह पारिवारिक कारणों से उद्धव ठाकरे की बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे, लेकिन जाधव से उनकी मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में उनके संभावित दल-बदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
उद्धव गुट ने किया खंडन
हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व ने इन सभी दावों को खारिज किया है। पार्टी नेता संजय राउत ने कहा कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा कि वक्त आने पर वे बताएंगे कि पार्टियां कैसे तोड़ी जाती हैं। यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख ने भी सफाई देते हुए कहा कि वह पारिवारिक कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो सके थे। हालांकि,अगले ही दिन उनकी प्रतापराव जाधव से मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
पुणे में 'ऑपरेशन टाइगर' के बैनरों से सियासी हलचल तेज
पुणे की राजनीति में इन दिनों "ऑपरेशन टाइगर" की जोरदार चर्चा शुरू हो गई है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से पहले पूरे शहर में लगाए गए रहस्यमयी बैनरों ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। शिवसेना पुणे शहराध्यक्ष प्रमोद भानगिरे की ओर से शहर के प्रमुख चौकों, सड़कों और महत्वपूर्ण स्थानों पर बड़े-बड़े बैनर लगाए गए हैं। इन बैनरों पर लिखा है – "ऑपरेशन टाइगर... जस्ट वेट एंड वॉच, तैयारी पूरी हो चुकी है"।
इन संदेशों के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आखिर "ऑपरेशन टाइगर" क्या है, इसका निशाना कौन है और इसके जरिए शिवसेना कौन सा बड़ा राजनीतिक कदम उठाने जा रही है, इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस नजदीक होने के कारण इन बैनरों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है, वहीं विरोधी दल भी इस अभियान पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि, "ऑपरेशन टाइगर" की वास्तविक रूपरेखा को लेकर शिवसेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन पूरे शहर में लगे बैनरों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि आने वाले दिनों में पुणे की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। फिलहाल पुणे में एक ही सवाल गूंज रहा है – आखिर क्या है "ऑपरेशन टाइगर"? इसका जवाब जानने के लिए सभी की नजरें अब शिवसेना के आगामी कार्यक्रमों और घोषणाओं पर टिकी हैं।
