सत्ता, संघर्ष और विवादों की विरासत...जानिए कैसा रहा शिबू सोरेन का सियासी सफर

झारखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले और झामुमो की स्थापना करने वाले वयोवृद्ध आदिवासी नेता शिबू सोरेन अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जिसने देश की राजनीति को नया आयाम दिया। 81 वर्षीय सोरेन का निधन एक ऐसे राजनीतिक युग का अंत है जिसने आदिवासी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उभारा।

Tribal titan Shibu Soren: झारखंड मुक्ति मोर्चा सुप्रीमो व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबी बीमारी का इलाज करा रहे थे। शिबू सोरेन वेंटिलेटर पर थे और उनकी हालत गंभीर थी। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें जून के आखिरी हफ्ते में किडनी संबंधी समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शिबू सोरेन पिछले 38 वर्षों से झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता थे और उन्हें पार्टी के संस्थापक संरक्षक के रूप में मान्यता प्राप्त थी। शिबू सोरेन के सियासी सफर पर नजर डालते हैं जिसे सत्ता, संघर्ष और विवादों की विरासत माना जा सकता है।

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शिबू सोरेन का सियासी सफर (PTI)

झारखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाई

झारखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले और झामुमो की स्थापना करने वाले वयोवृद्ध आदिवासी नेता शिबू सोरेन अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जिसने देश की राजनीति को नया आयाम दिया। 81 वर्षीय सोरेन का निधन एक ऐसे राजनीतिक युग का अंत है जिसने आदिवासी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उभारा। 11 जनवरी, 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव (तत्कालीन बिहार, अब झारखंड) में जन्मे सोरेन, जिन्हें 'दिशोम गुरु' (भूमि के नेता) और झामुमो के पितामह के रूप में जाना जाता था। वह देश के आदिवासी और क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य में सबसे स्थायी राजनीतिक हस्तियों में से एक रहे।

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