TMC Symbol Tussle: तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग ने गुरुवार को ऋतब्रत बनर्जी गुट और ममता बनर्जी गुट के प्रतिनिधियों को सुनवाई के लिए अलग-अलग बुलाया। इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किसी भी अंतरिम आदेश का विरोध किया, ऋतब्रत बनर्जी ने 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से पहले चुनाव चिन्ह पर जल्द फैसला मांगा।
टीएमसी चुनाव चिह्न विवाद (फोटो साभार: AI Image / Newsroom Verified)
इस बैठक के बाद दोनों गुट के बयान सामने आए। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, "हमने अपनी बात रखी और हमसे पूछे गए सवालों के जवाब दिए।" वहीं, ममता बनर्जी गुट के नेता कल्याण बनर्जी का बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के सामने हमने कई सवाल उठाए।
डेढ़ घंटी चली बैठक
कल्याण बनर्जी के मुताबिक, चुनाव आयोग के साथ चुनाव चिह्न विवाद को लेकर बैठक डेढ़ घंटे तक चली। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कल्याण बनर्जी ने कहा, ''सुनवाई करीब डेढ़ घंटे तक चली... अगर दूसरे गुट का यह दावा सही है कि 2025 में पार्टी की समय-सीमा समाप्त हो गई थी, तो फिर 2026 में वे निर्वाचित कैसे हो सकते हैं? वह चुनाव चिह्न तो ममता बनर्जी द्वारा जारी किया गया था।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि दूसरा गुट 3 जून को विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पास गया और खुद को AITC का ब्लॉक बताया। उन्होंने कहा कि उस दिन तक आपने AITC के अस्तित्व को स्वीकार किया था। फिर अचानक 22 जून को आपने कह दिया कि AITC का कोई अस्तित्व ही नहीं है। आप किसी चीज़ को एक साथ स्वीकार और अस्वीकार नहीं कर सकते। इस पार्टी में दुर्भावना क्या है? ऋतब्रत बनर्जी की दुर्भावना यह है कि चूंकि उन्हें विपक्ष का नेता नहीं चुना गया, इसलिए उन्होंने यह पूरा खेल रचा है।
'ऋतब्रत AITC के मूल सदस्य नहीं'
बकौल कल्याण बनर्जी, ऋतब्रत बनर्जी 2023 में पार्टी में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि ऋतब्रत पार्टी के मूल सदस्य नहीं थे। वह पार्टी पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं...
