Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में सुरक्षा बलों ने एलओसी पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे तीन लोगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के अनुसार, सेना ने इन्हें उस समय पकड़ा जब ये बारामूला जिले से लगी नियंत्रण रेखा को पार करने का प्रयास कर रहे थे।
जम्मू-कश्मीर के उरी में बढ़ी हलचल
जानकारी के मुताबिक, तीनों युवक बारामूला जिले के सोपोर क्षेत्र के निवासी हैं। बताया गया है कि शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि में उन्होंने हथलंगा-नांबला इलाके के रास्ते पीओके में जाने की कोशिश की थी। पकड़े गए लोगों की पहचान आदिल हुसैन डार, इश्फाक अहमद और जफर अहमद के रूप में हुई है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आदिल हुसैन डार टेरिटोरियल आर्मी (टीए)-161 का निलंबित जवान है। ये तीनों सोपोर के रहने वाले बताए गए हैं।
तीनों आरोपी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में
सूत्रों के अनुसार, हिरासत में लिए गए तीनों युवक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सक्रिय कुछ हैंडलर्स के संपर्क में थे। फिलहाल तीनों सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। इसी बीच उरी सेक्टर में एक अन्य घटना भी सामने आई है। सेना की एक यूनिट ने सिलिकोट क्षेत्र में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर भारतीय सीमा में प्रवेश करने वाले एक युवक को पकड़ लिया। पकड़े गए युवक की पहचान मुजफ्फराबाद निवासी जीशान मीर के रूप में हुई है।
प्रेमिका से मिलने के लिए एलओसी पार कर भारत आया
पूछताछ के दौरान जीशान मीर ने दावा किया कि वह उरी सेक्टर के तिलाई गांव में रहने वाली अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए एलओसी पार कर भारत आया था। अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा बल युवक और संबंधित युवती दोनों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि उसके दावों की सत्यता और घटना के अन्य पहलुओं की जांच की जा सके। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) लगभग 740 किलोमीटर लंबी है। यह बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जैसे कश्मीर घाटी के जिलों के अलावा जम्मू संभाग के पुंछ, राजौरी तथा जम्मू जिले के कुछ हिस्सों से होकर गुजरती है।
आधुनिक तकनीकों का सहारा
सुरक्षा बलों की प्राथमिक जिम्मेदारियों में आतंकियों की घुसपैठ रोकना, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना और सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सक्रिय आतंकी नेटवर्क अक्सर ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा के अंदर हथियार, गोला-बारूद, नकदी और मादक पदार्थ पहुंचाने की कोशिश करते हैं। सीमा के इस पार मौजूद उनके सहयोगी इन सामानों को इकट्ठा कर आतंकियों तक पहुंचाने का काम करते हैं, जिससे आतंकी गतिविधियों को समर्थन मिलता है। इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय सेना आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रही है। सीमा क्षेत्रों में हाईटेक एंटी-ड्रोन इक्विपमेंट की मदद से संदिग्ध ड्रोन की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय किया जा रहा है।
