Former CJI BR Gavai Exclusive Interview: भारत के पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) बी. आर. गवई ने टाइम्स नाउ के साथ एक एक्सक्लूसिव बातचीत में अपने कार्यकाल पर खुलकर बात की। टाइम्स नाउ के 'Newshour Agenda' कार्यक्रम में माधवदास जी के साथ एक विशेष बातचीत में पूर्व सीजेआई गवई ने अपने कार्यकाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों और न्यायिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एक न्यायाधीश का प्राथमिक कर्तव्य न्याय करना है।
पूर्व सीजेआई बीआर गवई (फोटो- PTI)
किन मामलों की सुनवाई में होती है देरी?
गवई ने कहा कि आम तौर पर आपराधिक और सिविल अपीलें तेजी से निपट जाती हैं, लेकिन बड़े संवैधानिक मामलों को समय लगता है, क्योंकि उनमें व्यापक प्रभाव और गहरी कानूनी पड़ताल शामिल होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आरक्षण में उप-वर्गीकरण पर आए ऐतिहासिक फैसले पर उन्होंने अपनी आधी गर्मी की छुट्टियां लगा दीं, जबकि नोटबंदी के फैसले ने लगभग पूरा क्रिसमस अवकाश ले लिया।
न्यायपालिका पूरी तरह से स्वतंत्र- गवई
उन्होंने यह भी कहा कि अदालतें अपने अनुभव के आधार पर यह तय करने में सक्षम हैं कि क्या राज्यपाल ने बहुत ज्यादा समय लिया है। गवई ने यह धारणा खारिज की कि सरकार के खिलाफ फैसले आने से कोई न्यायाधीश स्वतः स्वतंत्र साबित हो जाता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता का मतलब फैसले किसी पक्ष को खुश या नाराज करने के लिए देना नहीं, बल्कि तथ्यों और कानून के आधार पर निर्णय लेना है। कभी सरकार जीतती है, कभी हारती है—फैसले का आधार सिर्फ तथ्य और न्याय होना चाहिए। पूर्व सीजेआई ने कहा- "यह धारणा कि न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं है, पूरी तरह से ग़लत है। भारत में न्यायपालिका स्वतंत्र, मजबूत और स्थिर है।
अपने कार्यकाल पर क्या बोले पूर्व CJI गवई
अपने कार्यकाल को लेकर उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बतौर मुख्य न्यायाधीश उन्होंने वह सब करने की कोशिश की, जिसकी पहले से योजना बनाई गई थी। उनके अनुसार, उन्हें महसूस होता है कि यह अवधि उनके लिए व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों स्तर पर उपलब्धि भरी रही।
