Surat Man Missing Russia Russian Army: सूरत के हीरा उद्योग में मंदी के कारण 39 वर्षीय रमणीक सखवाला बेहतर नौकरी की तलाश में 2025 में रूस चले गए थे लेकिन शायद उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी जिंदगी में अप्रत्याशित मोड़ आएगा एवं वह रूसी सेना में गैर लड़ाकू पद पर पहुंच जायेंगे।
गुजरात: सूरत का हीरा कारीगर रूसी सेना में शामिल होने के बाद 4 महीने से लापता, परिवार ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
जून 2026 में रमणीक के रूसी सेना में शामिल होने के चार महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी, उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सूरत में रमणीक की पत्नी एवं 16 वर्षीय बेटे समेत उनका परिवार बेसब्री से उनके बारे में किसी खबर का इंतजार कर रहा है और सरकार तथा भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगा रहा है।
उनके भाई महेश सखवाला ने बुधवार को 'PTI' को बताया, 'सूरत के हीरा उद्योग में काम करना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रह गया था, इसलिए रमणीक बेहतर आजीविका के अवसरों की तलाश में रूस चले गए।'
रमणीक शुरुआत में 2025 में तीन महीने के 'बिजनेस वीजा' पर रूस गए थे, जिसे बाद में एक साल के लिए बढ़ा दिया गया। उनके भाई ने बताया कि रमणीक जून 2026 के आरंभ में रूसी सेना में शामिल हो गए और उन्होंने अपने परिवार को बताया कि उन्हें युद्ध के मोर्चे पर तैनात नहीं किया जाएगा।
महेश ने कहा, 'इसके बजाय, उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि उनकी ज़िम्मेदारी युद्ध क्षेत्र में मौजूद सैनिकों तक खाना पहुंचाने की होगी। रमणीक ने हमें बताया था कि उन्हें न तो लड़ना पड़ेगा और न ही कोई जोखिम भरा काम करना होगा। उनकी एकमात्र ज़िम्मेदारी खाना पहुंचाने की थी।'
अधिकारियों से बार-बार मदद मांगने के बावजूद कुछ पता नहीं
परिवार ने दावा किया है कि अलग-अलग अधिकारियों से बार-बार मदद मांगने के बावजूद, पिछले चार महीनों से रमणीक का कोई पता नहीं चल पाया है।
परिवार के अनुसार रमणीक ने आखिरी बार 24 जून को अपनी पत्नी शीतल से बात की थी और बताया था कि अगले 10-15 दिनों तक उनसे संपर्क नहीं हो पाएगा।
महेश ने बताया कि रमणीक के लापता होने के बाद, परिवार ने दिल्ली में विदेश मंत्रालय से संपर्क किया था। महेश ने बताया, 'हालांकि, अधिकारियों ने हमें सूचित किया कि चूंकि रमणीक ने रूसी पासपोर्ट ले लिया था, इसलिए उन्हें आगे की मदद के लिए रूसी संघ से संपर्क करना होगा।'
उन्होंने कहा कि रमणीक ने अपने परिवार के साथ अपने पासपोर्ट की एक तस्वीर और कुछ अन्य दस्तावेज भी साझा किए थे।
महेश ने कुछ दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि परिवार ने रमणीक का पता लगाने में मदद के लिए ईमेल के जरिए 'गुजरात स्टेट नॉन-रेजिडेंट गुजराती फाउंडेशन' से भी संपर्क किया था। उन्होंने मुंबई में रूसी संघ के महावाणिज्य दूतावास को भी पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।
रमणीक की पत्नी शीतल ने घर चलाने के लिए सिलाई का काम शुरू कर दिया है; परिवार के अन्य सदस्य भी आर्थिक रूप से उनकी मदद कर रहे हैं। महेश ने बताया कि रूस में भारतीय दूतावास ने परिवार को सूचित किया है कि वह रूसी अधिकारियों से रमणीक के बारे में जानकारी मांगेगा और कोई जवाब मिलने पर उन्हें बताया जाएगा।
