परिसीमन पर सुप्रिया सुले के संकेत से बदला सियासी गणित, संसद में 36 वोट का नंबर गेम, DMK बनी सबसे बड़ा फैक्टर

लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 540 मानी जाए तो संविधान संशोधन पारित कराने के लिए 360 मतों की आवश्यकता होगी। फिलहाल एनडीए के पास 324 सांसद हैं। यानी सरकार को कम से कम 36 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।

प्रस्तावित परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर संसद में सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के ताजा बयान ने सरकार और विपक्ष दोनों के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। सुप्रिया सुले ने संकेत दिया है कि यदि सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार होती है, तो उनकी पार्टी परिसीमन विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है।

सुप्रिया सुले

सुप्रिया सुले

20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में केंद्र सरकार 130वें और 131वें संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराने की तैयारी में है। चूंकि संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है, इसलिए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आवश्यक संख्या जुटाने की है।

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