Supreme Court: स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक जगहों से कुत्तों को हटाने के आदेश में बदलाव की मांग वाली 'डॉग लवर्स' की अर्जियों को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दिया। साथ ही शीर्ष अदालत ने अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने नवंबर 2025 के आदेश में संशोधन करने से भी इनकार कर दिया है।
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला।
फैसले में दखल देने की कोई जरूरत नहीं
कोर्ट ने कहा कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड के फैसले में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। वह इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि ABC के नियम वर्ष 2001 में लागू हुए थे। इसके बावजूद, आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में आधारभूत ढांचे का विस्तार और उसका आकलन करने के प्रयासों में स्पष्ट कमी रही है। प्रयास केवल छिटपुट रहे और उनमें संस्थागत गहराई का अभाव था। नसबंदी और टीकाकरण अभियान बिना किसी ठोस योजना के चलाए जाते रहे। इससे इस ढांचे के उद्देश्य ही विफल हो जाते हैं। यदि राज्यों ने दूरदृष्टि के साथ समय रहते कदम उठाए होते, तो वर्तमान स्थिति इतनी गंभीर और चिंताजनक रूप नहीं लेती।
तमिलनाडु में कुत्तों के काटने के 2 लाख मामले दर्ज
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम ये कहने के लिए मजबूर हैं कि ABC ढांचे को असरदार तरीके से लागू करने में गंभीर निष्क्रियता के कारण समस्या और अधिक बढ़ गई है। आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार जारी हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि यह समस्या अत्यंत चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी है। केवल राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में ही एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने के 1084 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्टों के अनुसार, छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें उनके चेहरों को नोच डाले जाने जैसी घटनाएँ भी शामिल हैं। वहीं तमिलनाडु में वर्ष के पहले चार महीनों में लगभग 2 लाख मामले दर्ज किए गए।
'बार-बार कुत्तों के काटने की घटनाएं होना गंभीर'
कोर्ट ने आगे कहा कि हमें मिली जानकारी के के मुताबिम हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों, शहरी केंद्रों आदि में कुत्तों के काटने की घटनाएं हो रही हैं। देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक IGI पर बार-बार कुत्तों के काटने की घटनाएं होना गंभीर है। सूरत में एक जर्मनी के सैलानी को कुत्ते ने काट लिया। ऐसी घटनाएं शहरी प्रशासन पर जनता में अविश्वास पैदा करती हैं। डॉग बाइट से होने वाला नुकसान केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गंभीरता बहुत ज्यादा है। 22 अगस्त और 7 नवंबर को जारी निर्देशों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई जानकारी से ये नहीं लगता कि उन निर्देशों का प्रभाव जमीनी स्तर तक पहुंचा है।
निर्देशों का अनुपालन न होना गंभीरता से देखा जाएगा-कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कोई भी अनुपालन न होना गंभीरता से देखा जाएगा। हमें इसको लेकर कड़ा एक्शन लेंगे। आदेशों की अवहेलना पर राज्यों के विरुद्ध अवमानना कार्यवाही, विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही तथा क्षतिपूर्ति संबंधी दायित्व की कार्यवाही शुरू की जाएगी। राज्य का दायित्व एक प्रभावी ढांचा तैयार करना है। गरिमा के साथ जीवन के अधिकार में भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है, अर्थात कुत्तों के हमले और काटने के खतरे से मुक्त जीवन। राज्य इस मामले में निष्क्रिय नहीं बने रह सकते। सुप्रीम कोर्ट कठोर जमीनी वास्तविकताओं से आंखें नहीं मूंद सकता, जहाँ बच्चे, विदेशी यात्री और वृद्ध लोग कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं।
जिनका इलाज संभव नहीं उन्हें यूथेनेशिया दिया जा सकता है-SC
कोर्ट ने कहा कि संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता जहां बच्चों और बुज़ुर्गों का जीवन केवल दया, शारीरिक शक्ति या संयोग के भरोसे टिका हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन शहरों या इलाकों में आवारा कुत्तों की समस्या ज्यादा बड़ी हो गई है वहां एक्सपर्ट की मदद लेकर उस पर काबू पाया जाए। वो संक्रमित कुत्ते, जिनका इलाज संभव नहीं है और वो समाज के लिए खतरा हैं उन्हें यूथेनेशिया दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन शहरों या इलाकों में आवारा कुत्तों की समस्या ज्यादा बड़ी हो गई है वहां एक्सपर्ट की मदद लेकर उस पर काबू पाया जाए। साथ ही कोर्ट ने कर्मचारियों को उचित ट्रेनिंग देने , एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कोर्ट ने NHAI से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए कदम उठाने, गौशाला बनाने और इन्हें वहां भेजने के निर्देश दिए हैं।
