'ब्रेस्ट पकड़ना रेप नहीं' वाले इलाहाबाद HC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा-ऐसी टिप्पणी पूरी तरह से 'असंवेदनशील'

Supreme Court on HC rape order : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें उसने कहा था कि 'एक किशोर लड़की की छाती पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचना की कोशिश करना' रेप अथवा रेप का प्रयास के अपराध में नहीं आता।

Supreme Court on HC rape order : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें उसने कहा था कि 'एक किशोर लड़की की छाती पकड़ना, उसके पायजामे की डोरी तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचना की कोशिश करना' रेप अथवा रेप का प्रयास के अपराध में नहीं आता। जस्टिस बीआई गवई की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और यह फैसला सुनाने वाले जज की अंसवेदनशीलता को दर्शाता है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि 'हमें यह कहते हुए दुख होता है कि जिस जज ने भी यह फैसला सुनाया, यह पूरी तरह से उसकी संवेदनहीनता को प्रदर्शित करता है।'

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर SC की रोक।

'यह सोच-समझकर सुनाया गया फैसला है'

जस्टिस गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यह फैसला अचानक से नहीं सुनाया गया बल्कि इस तरह का फैसला देना है, यह विचार जज के दिमाग में पहले से था क्योंकि इस मामले पर फैसला चार महीने तक सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया। पीठ ने आगे कहा कि फैसले की इस स्थिति पर हम आम तौर पर रोक नहीं लगाते लेकिन पैरा 21, 24 और 26 में की गई जज की टिप्पणियां कानून से मेल नहीं नहीं खातीं और यह अमानवीय नजरिए को पेश करती हैं, इसलिए हम आदेश पर रोक लगाते हैं।

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