हर अदालत में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और वॉशरूम जरूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि महिला वकीलों के लिए अलग से बार रूम नहीं होना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि महिला वकीलों को सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर की जिला, सब-डिवीजन और तहसील अदालतों में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम, वॉशरूम और दूसरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि इन सुविधाओं का इंतजाम महिला वकीलों की संख्या के आधार पर नहीं किया जा सकता। जहां भी महिला वकील प्रैक्टिस कर रही हैं, वहां उनके लिए अलग बार रूम और जरूरी सुविधाएं होनी चाहिए। इसके लिए अतिरिक्त जमीन या बजट की जरूरत पड़ने पर भी राज्य सरकारों और हाईकोर्ट को कदम उठाने होंगे।

सुप्रीम कोर्ट

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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि महिला वकीलों के लिए अलग से बार रूम नहीं होना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि महिला वकीलों को सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 2 दिसंबर को अगली सुनवाई करेगा।

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