Ashwini Bhide- सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में सरकारी और आरक्षित भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने के अपने आदेश का पालन न करने पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कमिश्नर अश्विनी भिड़े (Ashwini Bhide) के खिलाफ एक ऐतिहासिक और बेहद कड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने बीएमसी प्रमुख और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के नवंबर महीने के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू कर दी है।
अश्विनी भिड़े
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बीएमसी के उस अनुरोध को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें आदेश के पालन के लिए 30 दिन का और समय मांगा गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, क्या यह नहीं दिखाता कि आपके अधिकारी मिले हुए हैं? हम उसे जेल भेज देंगे तब उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पवित्रता समझ आएगी। कोर्ट ने इसे अतिक्रमणकारियों की मिलीभगत से किया गया एक शरारती उल्लंघन करार दिया। जस्टिस जोयमाल्या बागची ने निर्देश दिया कि आपको 1 दिसंबर 2026 तक कोई वेतन नहीं मिलेगा। इसलिए उससे पहले आदेश का पालन करें, अदालत में आएं और तब अपना वेतन निकालें।
पूरा मामला क्या है?
यह पूरा विवाद मुंबई में बेस्ट (BEST) बस स्टैंड और अन्य सरकारी व आरक्षित जमीन से अवैध अतिक्रमण को हटाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के पहले के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बीएमसी प्रशासन तय समय सीमा के भीतर जमीन से अवैध कब्जे और अतिक्रमण नहीं हटा पाया था। इसके खिलाफ परियोजना प्रस्तावक द्वारा अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह सख्त रुख अपनाया है।
वेतन कब तक रहेगा फ्रीज
जब तक बीएमसी कमिश्नर और संबंधित अधिकारी अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन कर के अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं करते, तब तक उनका वेतन रुका रहेगा। कोर्ट ने कमिश्नर अश्विनी भिड़े को नोटिस जारी कर यह बताने को कहा है कि आदेश की अवहेलना के लिए क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए।
