सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाए गए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर गुरुवार को राज्यसभा में जोरदार बहस हुई। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए इसे परीक्षा माफिया के खिलाफ सरकार का सख्त कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे अपर्याप्त करार देते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को संभालने में विफल रहने का आरोप लगाया। बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष एवं विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) की ‘मनुस्मृति’ संबंधी टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने तीखा विरोध जताया, जिसके बाद सभापति ने संबंधित टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे
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सरकार ने क्या कहा?
विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि वह 2024 में बने कानून और वर्तमान संशोधनों की आवश्यकता को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की अवधारणा पहली बार 1992 में सामने आई थी और विभिन्न समितियों की सिफारिशों के बावजूद इसे लागू करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने किया।
खरगे ने सरकार पर बोला हमला
बहस में हिस्सा लेते हुए विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल सजा और जुर्माने की राशि बढ़ा देने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उनका दावा था कि पिछले कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के आंदोलन और बढ़ते जनदबाव के कारण यह संशोधन लाने के लिए मजबूर हुई।
खरगे ने शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बढ़ते प्रभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप किया जा रहा है। इसी दौरान उन्होंने ‘मनुस्मृति’ का उल्लेख करते हुए कुछ टिप्पणियां कीं, जिनका सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से इस पर जवाब मांगा और कहा कि यदि सरकार जवाब नहीं दे सकती तो उसे जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
‘मनुस्मृति’ संबंधी टिप्पणी पर बवाल
खरगे के भाषण के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा (JP Nadda) ने कई बार हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को तथ्यों के आधार पर बोलना चाहिए। उन्होंने ‘मनुस्मृति’ संबंधी टिप्पणी को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि ऐसे बयान समाज में अनावश्यक भ्रम और तनाव पैदा कर सकते हैं। इसके बाद सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने निर्देश दिया कि ‘मनुस्मृति’ से जुड़ी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने ऐतिहासिक और साहित्यिक संदर्भों के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिन उद्धरणों का उल्लेख किया जा रहा है, वे मूल मनुस्मृति में नहीं हैं। उन्होंने विलियम जोन्स के अंग्रेजी अनुवाद तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तकों Who Were the Shudras? और The Untouchables का हवाला देते हुए कहा कि इतिहास की व्याख्या तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक दृष्टिकोण से।
प्रमोद तिवारी ने दिखाई किताब
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सदन में एक पुस्तक दिखाते हुए सरकार के तर्कों पर सवाल उठाए और कहा कि जिन पुस्तकों का उल्लेख किया जा रहा है, वे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने कहा कि परीक्षा रद्द होने का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को होता है और इसकी जवाबदेही सरकार को लेनी चाहिए। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने छात्र आंदोलनों के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी उल्लेख किया।
पेपर लीक रोकने के उद्देश्य से लाए गए इस संशोधन विधेयक पर राज्यसभा की बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक और वैचारिक टकराहट देखने को मिली। सरकार ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे छात्रों की मूल समस्याओं का पर्याप्त समाधान मानने से इनकार किया। हालांकि, बहस के दौरान ‘मनुस्मृति’ संबंधी टिप्पणी पर हुआ विवाद पूरे दिन की कार्यवाही का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया।
