कहानी अंतरिक्ष के 'महाबली' PSLV की, जिसकी मदद से इसरो मंगल और चांद पर फहरा चुका है तिरंगा; अब सूर्य की बारी

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Sep 2, 2023, 01:16 PM IST

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) भारत का तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है। यह पहला भारतीय प्रक्षेपण यान है जो तरल चरणों से सुसज्जित है। अक्टूबर 1994 में अपने पहले सफल प्रक्षेपण के बाद, पीएसएलवी भारत के एक विश्वसनीय और बहुमुखी लॉन्च वाहन के रूप में उभरा है।

इसरो ने आज अपना सूर्य मिशन अंतरिक्ष में भेज दिया है। इससे पहले चांद और मंगल पर इसरो अपने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। साथ ही कई सैटेलाइट को भी पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर चुका है। इन सभी मिशनों में एक चीज कॉमन थी, वो है पीएएसएलवी (PSLV) रॉकेट, जिसे अंतरिक्ष का महाबली भी कहा जाता है। यह एक के बाद एक मिशन को सफलता से अंजाम दे रहा है।

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अंतरिक्ष का महाबली पीएसएलवी रॉकेट (फोटो- ISRO)

तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) भारत का तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है। यह पहला भारतीय प्रक्षेपण यान है जो तरल चरणों से सुसज्जित है। अक्टूबर 1994 में अपने पहले सफल प्रक्षेपण के बाद, पीएसएलवी भारत के एक विश्वसनीय और बहुमुखी लॉन्च वाहन के रूप में उभरा है। इस रॉकेट ने कई भारतीय और विदेशी ग्राहक उपग्रह लॉन्च किए हैं।

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